पिपलियामण्डी: मल्हारगढ़ तहसील के सबसे बड़े गांवों में शामिल करीब 10 हजार की आबादी वाले ग्राम कनघट्टी में पेयजल संकट और गंदे पानी की समस्या गांव की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। हजारों ग्रामीण अब इस इंतजार में हैं कि आखिर उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल कब उपलब्ध हो पाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग दो माह से नलों में गंदा, मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा है, जिससे हजारों लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के मौसम में स्वच्छ पेयजल की समस्या ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं इस पूरे मामले को लेकर ग्राम पंचायत के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जलापूर्ति के लिए दो कुएं, दो ट्यूबवेल और एक नदी का स्रोत उपलब्ध है। इसके बावजूद प्रतिदिन केवल आधे घंटे ही नल सप्लाई दी जा रही है। जो पानी मिल रहा है, वह भी इतना गंदा होता है कि उसे पीना तो दूर घरेलू उपयोग में लेना भी मुश्किल हो जाता है। नदी का पानी सीधे कुए में डालकर सप्लाय हो रहा है। पानी को स्वच्छ करने के लिये फुलतार6 प्लांट भी नही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार पानी में मिट्टी और गाद तक दिखाई देती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
ग्राम पंचायत हर माह वसूल रही हजारों रुपये
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा गांव में करीब 1100 नल कनेक्शन दिए गए हैं। प्रत्येक उपभोक्ता से 90 रुपये प्रतिमाह नल शुल्क वसूला जाता है। इस प्रकार पंचायत को हर माह लगभग 99 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब नियमित रूप से शुल्क लिया जा रहा है तो बदले में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भी पंचायत की जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान स्थिति में ग्रामीणों को गंदा पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत नल कर तो समय पर वसूल रही है, लेकिन जलापूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। इसी कारण गांव में पंचायत और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
“कहीं दूसरा भागीरथपुरा न बन जाए कनघट्टी”
गांव के लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो कनघट्टी की स्थिति भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी हो सकती है, जहां दूषित पानी के कारण बड़ी संख्या में लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि गंदा पानी लोगों की सेहत के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। गांव के जागरूक युवा अजय नागरिया ने बताया कि दूषित पानी के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पंचायत द्वारा नल कर के नाम पर मोटी राशि वसूली जा रही है, लेकिन बदले में स्वच्छ पानी नहीं दिया जा रहा। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीणों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
चुनावी वादों पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत चुनाव के दौरान सरपंच महेश पाटीदार ने गांव को बेहतर और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन चुनाव जीतने के बाद पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सका। गांव में आज भी जल संकट और गंदे पानी की समस्या बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। इसके चलते लोगों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
नल कर्मचारी कर रहे प्रयास, लेकिन नहीं मिल रहा समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी और नल चालक अपने स्तर पर बेहतर व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण वे भी परेशान हैं। उनका कहना है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए पंचायत और प्रशासन को गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
ग्राम पंचायत सचिव गोपाल प्रजापत का कहना है कि गांव में पेयजल की सप्लाई नियमित रूप से की जा रही है और अभी तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। विभिन्न स्रोतों से पानी एकत्र कर सरकारी कुएं में डालने के बाद सप्लाई की जाती है। यदि कहीं समस्या है तो उसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
वहीं सरपंच महेश पाटीदार ने बताया कि कुछ समय पहले नदी से आने वाली पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। पाइपलाइन में मिट्टी जाने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हुई है। लाइन को सुधारने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसमें समय लग रहा है। जल्द ही व्यवस्था को पूरी तरह सुचारू करने का प्रयास किया जाएगा।
ग्रामीणों ने की जांच और स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) से मांग की है कि कनघट्टी की पेयजल व्यवस्था की जांच कराई जाए तथा नलों में सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल उनका अधिकार है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे पंचायत और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
