जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन व जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने छतरपुर में पुलिस कस्टडी में दो माह के भीतर चार मौतों के मामले को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने मामले में थानों के सीसीटीव्ही फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश देते हुए राज्य शासन सहित अन्य से जवाब तलब किया है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की गई है।
यह जनहित का मामला याचिकाकर्ता खजुराहो निवासी समाजसेवी पीयूष दीक्षित की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से दलील दी गई कि छतरपुर जिले के विभिन्न थानों में महज दो माह के भीतर चार युवकों की पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। इन मौतों के लिए पुलिस की थर्ड डिग्री जिम्मेदार है। जिस कारण मामले की जांच सीबीआई से कराने, दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज करने और सीसीटीवी फुटेज और काल डिटेल रिकार्ड तत्काल जब्त करने के निर्देश जारी किये जाने की राहत चाही गई।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और अधिवक्ता जितेंद्र कुमार दीक्षित ने पक्ष रखा। जबकि राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली उपस्थित रहे। राज्य शासन की ओर से अवगत कराया गया कि चार में से दो मामलों में न्यायिक जांच के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार, डीजीपी, आईजी सागर रेंज, छतरपुर पुलिस अधीक्षक और राजनगर, चांदला और गौरीहार थाना प्रभारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने सवाल भी उठाया कि चारों मामलों में पुलिस द्वारा लगभग एक जैसा जवाब दिया गया कि आरोपियों ने आत्महत्या कर ली या जहर खा लिया। जिस कारण पुलिस कस्टडी और हवालात जैसी सुरक्षित जगहों पर आरोपियों तक जहर या फांसी लगाने के साधन कैसे पहुंचे, यह जांच का विषय है।
