नयी दिल्ली, 30 मई (वार्ता) माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) के अध्यक्ष, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा ने अपने फोरम के समक्ष अपील के लिए आने वालों को पूरी तैयारी, पेशेवर कुशलता और तथ्यों पर पूरी पकड़ के साथ आने की अपील की है ।
पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल की ओर से यहां जीएसटीएटी एक राष्ट्रीय सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के महावाक्य “योगः कर्मसु कौशलम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि वकीलों को मुकदमों को पूरी लगन और उत्कृष्टता के साथ लड़ना चाहिए । उन्होंने कहा कि जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की सफलता समय पर, प्रभावी और ठोस न्याय देने में निहित है। यह फोरम जीएसटी लागू होने के सात साल बाद स्थापित हो पाया लेकिन अब यह वास्तविकता बन गया है।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि ट्रिब्यूनल का मार्गदर्शक सिद्धांत—” एपीलेट देवोभव ( अपीलीय देवो भव)”—पर ज़ोर दिया, जो यह सुनिश्चित करता है कि अपील करने वालों के साथ सम्मान से पेश आया जाए, और उनकी अपीलें निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के सुनी जाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कर दिए जाते हैं, तो प्रक्रिया में छोटी-मोटी कमियां मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसले में रुकावट नहीं बनेंगी, और जीएसटीएटी का लक्ष्य मामलों का निर्णायक समाधान करना है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने दोहराया कि जीएसटीएटी की सोच “न्याय है, न कि केवल निर्णय ” और इसकी सफलता को कानूनी निश्चितता और हल किए गए मामलों की संख्या से मापा जाएगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य में पोर्टल में और सुधार करने के लिए, जिसमें ज़्यादा ऑटोमेशन शामिल है, हितधारकों के सुझावों की समीक्षा करने के लिए एक समिति बनाई गई है।
सत्र की शुरुआत करते हुए, पीएचडी उद्योग मंडल की अप्रत्यक्ष कर समिति के अध्यक्ष चार्टर्ड अकाउंटेट अशोक बत्रा ने जीएसटी के तहत तथ्यों का पता लगाने वाली अंतिम संस्था के रूप में जीएसटीएटी के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि इसके गठन में देरी के बावजूद, ट्रिब्यूनल से करदाताओं को विवादों को सुलझाने का एक किफायती तरीका मिलने की उम्मीद है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि जीएसटी के तहत अब तक लाखों आदेश पारित किए जा चुके हैं, फिर भी जीएसटीएटी पोर्टल पर काफी हलचल देखने को मिली है।
इस पोर्टल पर अब तक 8,000 से ज़्यादा पंजीकरण हो चुके हैं और लगभग 11,400 अपीलें दायर की गयी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मामलों की भारी संख्या को देखते हुए, शुरुआत में ट्रिब्यूनल को मामलों का निपटारा करने में कुछ समय लग सकता है।
