अमेरिका, सहयोगी देशों ने समुद्र में उत्तर कोरिया के कथित प्रतिबंध उल्लंघन पर संरा से की कार्रवाई की मांग

वाशिंगटन/टोक्यो, 30 मई (वार्ता) अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के एक समूह ने समुद्र के रास्ते उत्तर कोरिया द्वारा कथित रूप से संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से उन जहाजों के खिलाफ कदम उठाने को कहा है, जिन पर प्रतिबंधित निर्यात गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के साथ-साथ यूरोपीय बाह्य कार्रवाई सेवा द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि उत्तर कोरिया के कोयले और लौह अयस्क के समुद्री निर्यात से जुड़े प्रतिबंध उल्लंघनों के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं। इन वस्तुओं के निर्यात पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लागू हैं।

संयुक्त बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1718 प्रतिबंध समिति से आग्रह किया गया कि वह उपलब्ध सूचनाओं की जांच करे और उन पांच जहाजों के खिलाफ उचित कार्रवाई करे, जिन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए उत्तर कोरियाई कोयला और लौह अयस्क के निर्यात में शामिल होने का आरोप है।

बयान में यह भी कहा गया कि दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2321 के तहत नामित किये गये सात अन्य जहाजों पर भी समिति को शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि उनका मामला अभी विचाराधीन है।

सहयोगी देशों ने 30 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ओपन सोर्स केंद्र द्वारा दी गयी प्रस्तुति का हवाला दिया, जिसमें जहाजों की तस्वीरें, यात्रा मार्गों का पुनर्निर्माण, ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) में कथित हेरफेर और बंदरगाह गतिविधियों का विश्लेषण शामिल था। जिन पांच जहाजों का उल्लेख किया गया है, उनमें ड्रीम वेव (आईएमओ 8693073), पीसफुल 8 (आईएमओ 1039424), ओरियन (आईएमओ 9638953), फू रन दा 1 (आईएमओ 1099814) और ओस्त्रोव अंत्सिफेरोवा (आईएमओ 9178070) शामिल हैं।

इन देशों का कहना है कि प्रस्तुत आंकड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में नामित सात अन्य जहाजों – फ्लाईफ्री, कैसियो, मार्स, कार्टियर, सोफिया/प्राडा, अरमानी और यी ली 1 – के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गयी है।

संयुक्त बयान में कहा गया, “तत्काल नामांकन और कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध व्यवस्था की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।” जापान ने कहा कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने और उत्तर कोरिया के परमाणु तथा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के पूर्ण उन्मूलन के लिए प्रयास जारी रखेगा।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1718 समिति उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के बाद लगाये गये संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने का कार्य करती है।

 

 

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