बढ़ी ड्यूटी और महंगाई ने तोड़ी चमक, देश में सोने की खरीदारी 70% तक घटी

नई दिल्ली। सोने पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी के बाद देश में पीली धातु की मांग में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के ताजा आकलनों के अनुसार सोने की मांग पिछले पखवाड़े में घटकर मात्र 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह करीब 25 टन थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई लागत, महंगाई का दबाव और उपभोक्ताओं की बदली प्राथमिकताओं ने सोने के बाजार की रफ्तार धीमी कर दी है।

सरकार ने 13 मई को सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद सोने पर कुल प्रभावी कर भार लगभग दोगुना होकर 18.45 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका सीधा असर खुदरा बाजार और ज्वेलरी कारोबार पर पड़ा है। उद्योग जगत के अनुसार, शुल्क वृद्धि के बाद सोने की मांग में करीब 70 प्रतिशत तक कमी आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे अधिक असर छोटे और असंगठित कारोबारियों पर पड़ा है, जिनकी हिस्सेदारी देश के कुल स्वर्ण व्यापार में लगभग 65 प्रतिशत मानी जाती है। बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहकों ने खरीदारी टालना शुरू कर दिया है। मुंबई के स्पॉट बाजार में 999 शुद्धता वाला सोना लगभग 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिससे आम उपभोक्ता के लिए सोना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है।

ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि केवल आयात शुल्क ही नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल, खाद्य वस्तुओं और दैनिक जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की क्रय क्षमता को प्रभावित किया है। ऐसे में उपभोक्ता फिलहाल निवेश और आभूषण खरीदने के बजाय आवश्यक खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से परहेज करने की अपील का भी कुछ असर देखने को मिला है। प्रमुख ज्वेलरी रिटेल चेन संचालकों का कहना है कि उनके यहां बिक्री में 35 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। हालांकि आने वाले महीनों में मांग किस दिशा में जाएगी, इसे लेकर अभी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।

इस समय चल रहे अधिक मास को भी खरीदारी में सुस्ती का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में लोग सोना सहित अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की खरीद से बचते हैं। दिलचस्प बात यह है कि निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या में भी कमी आई है।

उद्योग जगत का अनुमान है कि वर्ष की पहली तिमाही में मजबूत रही सोने की मांग दूसरी तिमाही में कमजोर पड़ सकती है। यदि कीमतों और करों का दबाव बना रहा तो आने वाले समय में स्वर्ण कारोबार को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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