नई दिल्ली। 29 दिसंबर, 2025। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा पर कड़ा रुख अपनाया है। रविवार को जारी बयान में ओवैसी ने दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की नृशंस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर हमला बताया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वहां की वर्तमान स्थिति अल्पसंख्यकों के लिए असुरक्षित होती जा रही है, जो कि बांग्लादेश के मूल संवैधानिक जनादेश के विपरीत है। ओवैसी ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस वहां रहने वाले करीब 2 करोड़ गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
सुरक्षा का सवाल: भारत की स्थिरता के लिए बांग्लादेश का शांत रहना जरूरी, विदेशी ताकतों की सक्रियता पर ओवैसी ने किया आगाह
ओवैसी ने भारत-बांग्लादेश संबंधों की संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि पड़ोसी देश में स्थिरता भारत की आंतरिक सुरक्षा, विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि बांग्लादेश में जारी उथल-पुथल का लाभ उठाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और चीन जैसी भारत विरोधी ताकतें सक्रिय हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ओवैसी ने भारत सरकार द्वारा द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाए रखने के प्रयासों का समर्थन किया और आशा व्यक्त की कि फरवरी में होने वाले चुनावों के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग और अधिक मजबूत होगा।
भीड़तंत्र का विरोध: बांग्लादेश के बहाने भारत की घटनाओं पर भी उठाए सवाल, कानून का शासन मजबूत करने की अपील
बांग्लादेश की स्थिति पर दुख जताने के साथ ही ओवैसी ने भारत में हाल ही में हुई लिंचिंग की घटनाओं पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने ओडिशा के संबलपुर में बंगाल के मजदूर की हत्या और उत्तराखंड में आदिवासी छात्र एंजेल चकमा की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि बहुसंख्यक आधारित राजनीति कानून के शासन को कमजोर करती है। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि चाहे बांग्लादेश हो या भारत, भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए घातक है। उन्होंने दोनों देशों की सरकारों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रहने वाले सभी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और न्याय का समान अधिकार प्रदान करें।

