
इंदौर. बाणगंगा थाना क्षेत्र में ऑनलाइन लोन ऐप के जरिए ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. यहाँ एक महिला को महज 40 हजार रुपये का लोन लेना उस वक्त भारी पड़ गया, जब साइबर अपराधियों ने उनके मोबाइल का डेटा हैक कर उनके निजी फोटो-वीडियो को अश्लील बना दिया. बदनामी के डर से पीड़िता ने 6 महीने के भीतर आरोपियों को साढ़े चार लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन इसके बावजूद जालसाजों ने उनके एडिटेड फोटो रिश्तेदारों को भेज दिए. पीड़िता की शिकायत पर बाणगंगा पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है.
क्षेत्र में रहने वाली एक महिला पीड़िता ने थाने पहुँचकर इस चीनी लोन ऐप गिरोह के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अक्टूबर 2025 में उसे अचानक पैसों की सख्त जरूरत आन पड़ी थी. इसी दौरान उसने गूगल प्ले स्टोर से क्रेडिट लीफ नामक एक मोबाइल लोन एप्लिकेशन डाउनलोड की और उसके जरिए 7 दिनों की अवधि के लिए 40 हजार रुपये का लोन लिया था.लोन की राशि खाते में आने के बाद, अभी उसकी अंतिम तारीख पूरी भी नहीं हुई थी कि पीड़िता के मोबाइल पर अंतरराष्ट्रीय नंबरों +92, +1 व अन्य विदेशी कोड से व्हाट्सएप कॉल और मैसेजेस आने शुरू हो गए. फोन करने वाले अज्ञात आरोपियों ने बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए लोन की रकम तुरंत चुकाने के लिए धमकाना शुरू कर दिया.पीड़िता का आरोप है कि ऐप डाउनलोड करते वक्त आरोपियों ने उसके मोबाइल के कॉन्टैक्ट लिस्ट, गैलरी और पर्सनल वीडियो का बैकअप चुरा लिया था. आरोपियों ने धमकी दी कि यदि तुरंत पैसे नहीं भेजे, तो मोबाइल में मौजूद उसकी तस्वीरों और वीडियो को एडिट कर अश्लील बना दिया जाएगा और उसे फोन बुक में मौजूद सभी संपर्कों और रिश्तेदारों को वायरल कर दिया जाएगा.शुरुआत में लोक-लाज और सामाजिक बदनामी के डर से पीड़िता ने घबराकर आरोपियों द्वारा मांगे गए 80 हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से ट्रांसफर कर दिए. लेकिन एक बार रकम मिलते ही साइबर अपराधियों की भूख और बढ़ गई. वे लगातार नए-नए नंबरों से डराकर पैसों की मांग करने लगे. इस तरह डरा-धमकाकर पिछले 6 महीनों के दौरान आरोपियों ने पीड़िता के बैंक खाते से अलग-अलग किश्तों में करीब 4 लाख 50 हजार रुपये वसूल लिए.हद तो तब हो गई जब लाखों रुपये ऐंठने के बाद भी साइबर ठगों का मन नहीं भरा. उन्होंने पीड़िता के फोटो को आपत्तिजनक रूप से एडिट किया और उसके रिश्तेदारों व परिचितों के व्हाट्सएप नंबरों पर भेज दिया. जब पीड़िता के पास उसके रिश्तेदारों और करीबियों के फोन आने शुरू हुए, तब उसे इस बात का अहसास हुआ कि वह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के जाल में फंस चुकी है. मानसिक रूप से परेशान होने के बाद अंततः पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और परिजनों को साथ लेकर बाणगंगा थाने में केस दर्ज कराया.
