
भोपाल। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब उस मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सीबीआई केवल बयानों पर नहीं बल्कि घटनाक्रम के वैज्ञानिक पुनर्निर्माण और आरोपियों के फैसलों की मंशा को परखने में जुट गई है। जांच एजेंसी ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से पूछताछ का केंद्र उन कदमों को बनाया है, जिन्होंने शुरुआत से ही मामले को संदेह के घेरे में ला दिया था। सीबीआई ने उनसे पूछा कि यदि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया था तो एफआईआर दर्ज होने से पहले अग्रिम जमानत लेने की जरूरत क्यों पड़ी और बेटे समर्थ को जांच के दौरान दूर रहने की सलाह क्यों दी गई। सूत्रों के अनुसार इन सवालों पर शुरुआती हिचकिचाहट के बाद गिरिबाला सिंह ने स्वीकार किया कि ऐसे निर्णयों ने उन पर संदेह और गहरा किया। इसी आधार पर सीबीआई अब घटनाओं की पूरी श्रृंखला को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
शुक्रवार को गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को अदालत में पेश किया गया, जहां सीबीआई ने बताया कि जांच में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का सत्यापन अभी बाकी है और दोनों के बयानों में मौजूद तथ्यों की पड़ताल आवश्यक है। अदालत ने दोनों को पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसी का सबसे महत्वपूर्ण कदम अब घटनास्थल पर पूरे घटनाक्रम का रिक्रिएशन माना जा रहा है। समर्थ का दावा है कि उसने ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा था, जबकि गिरिबाला सिंह ने फंदे की गांठ खोली थी। इस दावे की सच्चाई जांचने के लिए सीबीआई 80 किलो वजन की डमी का उपयोग करेगी, जो ट्विशा के वजन के बराबर होगी। भोपाल स्थित घर में पहले से की गई 3डी मैपिंग के आधार पर घटनाक्रम को दोहराया जाएगा और देखा जाएगा कि आरोपियों का दावा व्यावहारिक तथा वैज्ञानिक रूप से संभव था या नहीं।
फोरेंसिक जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। जिस बेल्ट या सामग्री के उपयोग से फंदा लगाए जाने की बात सामने आई है, उसकी मजबूती और वजन सहने की क्षमता का परीक्षण कराया जाएगा। साथ ही आरोपियों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, चैट और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। जांचकर्ता उन सभी बिंदुओं पर विशेष ध्यान दे रहे हैं जहां दोनों के बयान आपस में मेल नहीं खाते।
सीबीआई ने पूछताछ के लिए 50 से अधिक सवालों की सूची तैयार की है। इनमें एसआईटी के नोटिसों के बावजूद पूछताछ में शामिल न होने, जांच से बचने की कोशिश, संभावित साक्ष्य छिपाने और हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़े प्रश्न प्रमुख हैं। अलग-अलग पूछताछ के बाद अब दोनों को आमने-सामने बैठाकर भी सवाल किए जाएंगे, ताकि विरोधाभासी तथ्यों की सच्चाई सामने लाई जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि घटनास्थल के पुनर्निर्माण और फोरेंसिक परीक्षण से इस हाई प्रोफाइल मामले के कई अहम रहस्यों से पर्दा उठ सकता है।
