मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम गठबंधन में बढ़ते तनाव और आर्थिक दबाव के कारण समय से पहले चुनाव कराने पर विचार कर रहे हैं। फरवरी 2028 से पहले ही देश में मतदान हो सकता है।
मलेशिया में इस वक्त कई तरह के राजनीतिक और भारी आर्थिक संकट एक साथ खड़े हो गए हैं। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम सत्तारूढ़ गठबंधन में बढ़ते तनाव को देखकर काफी ज्यादा चिंतित हैं। इसलिए वह समय से पहले देश में आम चुनाव कराने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं। अगले आम चुनाव वैसे तो फरवरी 2028 में होने वाले हैं।
लेकिन राजनीतिक अस्थिरता के कारण अनवर संसद को पहले भंग करने के लिए राजा की सहमति मांग सकते हैं। सरकारी सांसदों के अनुसार जुलाई महीने में ही देश में चुनाव आयोजित किए जा सकते हैं। इससे पहले 2020 से जारी भारी राजनीतिक संघर्ष के कारण चुनाव चक्र पूरी तरह टूट गया था। अनवर ने 2022 में एकता सरकार बनाकर देश में स्थिरता लाने का शानदार काम किया था।
राज्य और आम चुनाव
मलेशिया एक संघीय प्रणाली वाला देश है जहां अधिकांश राज्य चुनाव संघीय चुनाव के साथ होते हैं। कुछ राज्य सरकारें अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही गिर गईं जिससे चक्र टूट गया। अगले वर्ष जोहोर, मलक्का और सारावाक राज्यों में चुनाव होने हैं जिससे लागत कम हो सकती है। नवंबर 2022 में अनवर ने पकातां हरपन गुट और बरिसन नेशनल (बीएन) को मिलाकर सरकार बनाई थी। हालांकि इस सत्ताधारी गठबंधन को आंतरिक मतभेदों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा है। जोहोर बीएन ने आगामी राज्य चुनाव पकातां के समर्थन के बिना स्वतंत्र रूप से लड़ने की घोषणा की है।
नजीब रजाक का मामला
अनवर को पूर्व प्रधानमंत्री नजीब रजाक को दी गई शाही माफी को लेकर भारी दबाव झेलना पड़ा है। नजीब रजाक अरबों डॉलर के 1एमडीबी घोटाले में शामिल होने के कारण 2022 से जेल में बंद हैं। यूएमएनओ पार्टी लगातार इस मामले पर प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सरकार पर कड़ा दबाव बना रही है। ईरान पर युद्ध के चलते ऊर्जा सब्सिडी का बिल बढ़कर 7 अरब रिंगिट या 1.77 अरब डॉलर हो गया है। इससे मलेशिया सरकार की वित्तीय स्थिति पर बहुत ही भारी और गंभीर दबाव बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि सब्सिडी में कटौती करने से पहले अनवर को नए जनादेश की जरूरत होगी।
बिखरा हुआ विपक्ष
देश में विपक्ष की बिखरी हुई स्थिति को देखकर समय से पहले चुनाव होने से अनवर को फायदा हो सकता है। पीएएस के सहयोगी दल बरसातू में भारी आंतरिक कलह के कारण दर्जनों नेताओं को पार्टी से बर्खास्त किया गया है। विपक्ष की यह कमजोरी अनवर इब्राहिम के गठबंधन के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकती है।
