इंदौर: नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में अक्सर दोहरा मापदंड देखने को मिलता है. फुटपाथ से गरीब और छोटे रेहड़ी-पटरी वालों का सामान तुरंत जब्त कर लिया जाता है या उन्हें हटा दिया जाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों और बड़े दुकानदारों पर नरमी बरती जाती है, जिससे निगम की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं.मामला फुटपाथ पर अवैध तरीके से कब्जे और पथ विक्रेताओं से जुड़ा हुआ है. हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में राजमोहल्ला क्षेत्र में निगम की पीली गैंग द्वारा एक पथ विक्रेता का फल-सब्जी का सामान सड़क पर फेंकते और ठेला जब्त करते हुए देखा जा रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि फुटकर व्यापारी रोज कमाकर परिवार चलाते हैं, ऐसे में इस तरह की कार्रवाई उनके लिए बड़ा संकट बन जाती है. उन्हें स्थाई जगह नहीं दी गई. इससे वे फुटपाथ पर दुकान लगाने को मजबूर हैं. इसके अलावा ठेला संचालकों को बिना पूर्व चेतावनी या पर्याप्त समय दिए उनका सामान फेंक दिया जाता है या जब्त कर लिया जाता है, जिससे उनकी रोजी-रोटी छिन जाती है. शहर के कुछ प्रमुख क्षेत्रों में ही बार-बार कार्रवाई होती है, जबकि कई घनी आबादी वाले इलाकों में स्थाई अतिक्रमण जमे रहते हैं.
इसका जीवंत उदाहरण राजवाड़ा के पास आड़ा बाजार मार्ग है. यहां पर कई दुकानदार वर्षों से फुटपाथ पर 7 से 8 फीट तक सामान फैलाकर कब्जा किए हुए हैं. इससे सड़क संकरी हो गई है और पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है. आरोप है कि निगम की पीली गैंग के पहुंचने से पहले व्यापारियों को सूचना मिल जाती है, जिससे वे अस्थायी रूप से सामान हटा लेते हैं और कार्रवाई खत्म होते ही दोबारा कब्जा जमा लिया जाता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निगम छोटे पथ विक्रेताओं पर सख्ती और बड़े व्यापारियों पर नरमी क्यों बरत रहा है.
इनका कहना है…
निगम को कार्रवाई जरूर करना चाहिए, लेकिन नियम सभी के लिए एक जैसे हों, पथ विक्रेताओ का सामान फेंक दिया जाता है, जबकि बड़े दुकानदार खुलेआम फुटपाथ घेर लेते हैं, इससे निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
– संजय साल्वे
गरीब मजदूर रोज कमाकर परिवार चलाते हैं, निगम वाले आते हैं तो सामान सड़क पर फेंक देते हैं और ठेला उठा ले जाते हैं, जबकि बड़े दुकानदारों पर कभी ऐसी कार्रवाई नहीं होती. गरीबों पर ही सख्ती करना गलत है.
– घनश्याम
शहर को व्यवस्थित करना जरूरी है, लेकिन प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाना चाहिए. यदि फुटपाथ से अतिक्रमण हटाना है तो कार्रवाई बिना भेदभाव के हो. छोटे व्यापारियों पर दबाव और बड़े कब्जाधारियों को राहत देना गलत संदेश देता है.
– अर्जुन राजपूत समाजसेवी
