रेहटी। थाना क्षेत्र से वन्यजीव क्रूरता की एक बेहद गंभीर और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. ग्राम चकल्दी में खेतों में घुस आए एक विशालकाय मगरमच्छ को आक्रोशित ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर मौत के घाट उतार दिया.
घटना के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है. मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है. जानकारी के अनुसार, रेहटी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चकल्दी के पास स्थित खेतों में अचानक एक भारी-भरकम मगरमच्छ दिखाई दिया. खेतों के बीच मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई. आमतौर पर नदी या जलाशयों के किनारे मगरमच्छ देखे जाते हैं, लेकिन खेतों में उसके पहुंचने से लोग भयभीत हो गए. बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना देने या रेस्क्यू टीम का इंतजार करने के बजाय खुद ही मगरमच्छ को घेर लिया. देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग लाठी-डंडे और अन्य हथियार लेकर मौके पर पहुंच गए. ग्रामीणों ने मगरमच्छ पर ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
घटना के दौरान मौजूद कुछ लोगों ने तस्वीरें भी खींचीं, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. वायरल तस्वीरों में मगरमच्छ अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता दिखाई दे रहा है, जबकि भीड़ उस पर लगातार वार कर रही है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ अर्चना पटेल ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने बताया कि वन विभाग की विशेष टीम को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया है और पूरे क्षेत्र में सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है. वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि मगरमच्छ खेतों तक कैसे पहुंचा और घटना में शामिल लोगों की पहचान भी की जा रही है. इधर, चकल्दी और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में मगरमच्छ आने से उनकी जान को खतरा था. किसानों के अनुसार फसल कटाई और सिंचाई के दौरान ऐसे हिंसक जीवों की मौजूदगी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
हालांकि, पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि खतरे की स्थिति में भी कानून हाथ में लेना उचित नहीं है. उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में तुरंत वन विभाग या रेस्क्यू टीम को सूचना दी जानी चाहिए थी, ताकि वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके.
फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. अब देखना है कि वन विभाग इस प्रकरण में क्या कार्रवाई कर पाता है.
