आरटीओ की कार्रवाई या दिखावटी अभियान

इंदौर: परिवहन विभाग द्वारा यात्री बसों और अन्य वाहनों के खिलाफ चलाए गए विशेष जांच अभियान पर सवाल उठने लगे हैं. विभाग ने दावा किया है कि सघन जांच के दौरान विभिन्न वाहन संचालकों से कुल 65 हजार 500 रुपये का जुर्माना वसूला गया, लेकिन इतने बड़े स्तर पर चलने वाले यात्री परिवहन नेटवर्क के मुकाबले यह कार्रवाई बेहद मामूली मानी जा रही है.

परिवहन आयुक्त उमेश जोगा और कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर आरटीओ इंदौर एवं संभागीय परिवहन उड़नदस्ता ने धार रोड, राऊ और पीथमपुर क्षेत्र में बसों व अन्य वाहनों की जांच की. अधिकारियों ने परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य दस्तावेजों की जांच की, साथ ही फायर सेफ्टी उपकरण और स्पीड गवर्नर भी चेक किए. हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में यात्री वाहन नियमों का उल्लंघन कर रहे थे तो कार्रवाई सिर्फ जुर्माने तक ही सीमित क्यों रही कई वाहन संचालकों पर वर्षों से बिना फिटनेस, ओवरलोडिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन विभाग की कार्रवाई अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है.

अभियान के दौरान अधिकारियों ने यात्रियों से फीडबैक लेकर यह जानने की कोशिश भी की कि चालक तेज गति से वाहन चला रहे हैं या मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. बावजूद इसके, शहर और आसपास के क्षेत्रों में आए दिन बेलगाम बसों और लापरवाह ड्राइविंग की शिकायतें सामने आती रहती हैं.
आकस्मिक जांच जारी रहेगी
यह कार्रवाई आरटीओ प्रदीप शर्मा और उड़नदस्ता प्रभारी आकाश सिटोले के नेतृत्व में की गई. विभाग का कहना है कि स्कूल और कॉलेज वाहनों की आकस्मिक जांच आगे भी जारी रहेगी, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि केवल अभियान चलाने से नहीं, बल्कि स्थायी और कठोर कार्रवाई से ही सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी

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