अमेरिकी सीनेटर ने ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप पर साधा निशाना, कहा- अंतहीन युद्ध की शुरुआत

वॉशिंगटन, 27 मई (वार्ता) अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने ‘एक और अंतहीन युद्ध शुरू करने’ के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी आलोचना की है और दावा किया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे सीनेटर वॉर्नर ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में श्री ट्रंप पर वादे तोड़ने और महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “श्री डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि युद्ध खत्म होने वाला है, लेकिन सच यह है कि अमेरिका अब भी ईरान पर हमले कर रहा है। वह अपना हर वादा तोड़ रहे हैं। नये अंतहीन युद्ध शुरू कर रहे हैं और हर चीज की कीमतें बढ़ा रहे हैं।”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब एक तरफ बातचीत की रफ्तार बेहद धीमी है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने सोमवार को दक्षिणी ईरान पर नये हमले किये हैं। इन हमलों में ईरानी मिसाइल ठिकानों और बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही नावों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक बयान में कहा कि ये हमले ‘आत्मरक्षा’ में किये गये थे और इनका मकसद ‘ईरानी बलों की तरफ से पैदा हुए खतरों से हमारे सैनिकों की रक्षा करना’ था। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए कहा कि श्री ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए ‘ठोस कदम’ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रपति ट्रंप ही हैं, जो ईरानी हुकूमत को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि श्री ट्रंप ने फारस की खाड़ी में अमेरिका के गठबंधनों को मजबूत किया है और अब्राहम समझौते के जरिये क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के काम के नतीजे खुद गवाही दे रहे हैं। अमेरिका को मजबूत बनाने और अमेरिकी नेतृत्व को फिर से बहाल करने का उनका संदेश और मिशन पूरी तरह स्पष्ट और निरंतर है।”
श्री पिगॉट ने कहा कि पहले दिन से ही श्री ट्रंप का यह मानना रहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए, और उन्होंने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए निर्णायक कदम उठाये हैं। इसी बीच फॉक्स न्यूज ने रिपोर्ट दी है कि हालिया जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों को जनता का बहुत कम समर्थन मिल रहा है। उसके पोल के अनुसार, केवल 39 फीसदी पंजीकृत मतदाता ही इस बात का समर्थन करते हैं कि अमेरिकी सैन्य अभियान ‘जब तक जरूरी हो’ जारी रहना चाहिए, जबकि 61 फीसदी मतदाता ‘एक सीमित समय सीमा’ को प्राथमिकता देते हैं। यह रिपोर्ट सीएनएन ने भी प्रकाशित की है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स-सिएना कॉलेज के एक पोल में सामने आया है कि 52 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि अमेरिका को परमाणु समझौते के बिना भी सैन्य अभियान खत्म कर देना चाहिए, जबकि केवल 37 फीसदी मतदाता इस बात के पक्ष में हैं कि बातचीत नाकाम होने की स्थिति में भी हमले जारी रहने चाहिए। इस बीच होर्मुज जलडमरू मध्य के पास ईरानी मिसाइल ठिकानों और जहाजों पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। आईआरजीसी ने यह दावा भी किया है कि ‘पिछले एक दिन और रात’ के दौरान तेल टैंकरों समेत 25 जहाज इस जलडमरूमध्य से होकर सुरक्षित गुजरे हैं।

ईरान-अमेरिका ने एक ऐसे समझौते की दिशा में प्रगति के संकेत दिये हैं, जिसका मकसद हफ्तों तक चले संघर्ष को खत्म करने वाले युद्धविराम को एक अधिक स्थायी समाधान में बदलना है। दोनों पक्ष बचे हुए विवादित मुद्दों को सुलझाने के एक सहमति पत्र पर चर्चा कर रहे हैं, हालांकि अधिकारी इसे अब भी शुरुआती चरण में बता रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी यही बात कही है। इस बीच रिपब्लिकन पार्टी के आक्रामक रुख वाले नेताओं ने आकार ले रहे इस समझौते की आलोचना करते हुए इसे ‘आपदा’ बताया है और सरकार के इस रवैये पर सवाल खड़े किये हैं। सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष रोजर विकर ने कहा कि प्रस्तावित 60 दिनों का युद्धविराम पिछले सैन्य प्रयासों को ‘पूरी तरह बेकार’ कर देगा। उन्होंने आगे कहा कि इससे इस पूरे सैन्य अभियान के मुख्य उद्देश्यों के कमजोर पड़ने का खतरा पैदा हो जायेगा।

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