
इंदौर. चर्चित हनी ट्रैप-2 मामले में गिरफ्तार प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा को अदालत से राहत नहीं मिली है. अपर सत्र न्यायालय में सुनवाई के बाद न्यायाधीश मनीष कुमार लोवंशी ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी.
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से जिला लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर ने जमानत आवेदन का विरोध किया. उन्होंने तर्क रखा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और आरोपी की भूमिका जांच में सामने आई है. यदि उसे जमानत दी जाती है तो साक्ष्यों को प्रभावित करने और जांच को प्रभावित करने की आशंका बनी रहेगी.
कोर्ट ने केस डायरी, जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए माना कि प्रकरण की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है. ऐसे में आरोपी को इस स्तर पर जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं है. इसी आधार पर न्यायालय ने आवेदन निरस्त कर दिया. क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि आरोपी, जो पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ था, कथित रूप से हनी ट्रैप गिरोह के संपर्क में था और पूरे घटनाक्रम में रणनीतिक भूमिका निभा रहा था. जांच एजेंसियों के अनुसार मुख्य आरोपी अलका दीक्षित से उसका लगातार संपर्क था और ब्लैकमेलिंग की रणनीति बनाने में उसकी भूमिका सामने आई है. मामले में शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर से कथित रूप से एक करोड़ रुपए की मांग और ब्लैकमेलिंग की जांच के दौरान विनोद शर्मा की संलिप्तता के साक्ष्य मिलने पर उसे गिरफ्तार किया था. उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में अलका दीक्षित, जयदीप, लाखन चौधरी, रेशू चौधरी और श्वेता विजय जैन सहित कई आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में हैं. वहीं लाखन चौधरी की जमानत याचिका भी पूर्व में खारिज की जा चुकी है.
