मंत्रिमंडल विस्तार की आहट से राजनीतिक हल्कों में बेचैनी

दिल्ली डायरी प्रवेश कुमार मिश्र। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की आहट के बाद दिल्ली के सत्ताधारी गलियारों में एक अलग किस्म की बेचैनी महसूस की जा रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों जिस तरह से मंत्रिमंडल सहयोगियों की मौजूदगी में एक एक मंत्रालयों का रिपोर्टकार्ड रखते हुए विस्तृत और व्यवहारिक चर्चा की उसके बाद ज्यादातर विभागों में सन्नाटा पसरा हुआ है. जहां एक तरफ मंत्रियों को अपनी कुर्सी की चिंता सताने लगी है वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिकारियों को भी कमजोर या खराब प्रदर्शन के आधार पर पदस्थापन का डर लगने लगा है.

राजनीतिक हल्कों में लगभग एक दर्जन मंत्रियों की छुट्टी होने की खबर ने दूसरे व तीसरे ग्रेड पाने वाले मंत्रियों को चिंता में डाल दिया है. दिल्ली में डेरा डाले ऐसे तमाम मंत्री संघ व वरिष्ठ मंत्रियों से आशीर्वाद पाकर अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में लगे हैं. चर्चा है कि पहली बार राज्यमंत्री बने कुछ मंत्रियों ने कुर्सी जाने के भय से अपने बचाव में वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं देने की बात कहकर अपने पैरवीकारों से एक और मौका दिलाने की मांग की है. बिखरते कुनबे और सिकुड़ते जनाधार से टीएमसी बेचैन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने और टीएमसी पराजय के बाद भी पश्चिम बंगाल का राजनीतिक घटनाक्रम इन दिनों सुर्खियों में है. कभी बंगाल की शेरनी कही जाने वाली पूर्व मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी इन अपने कुनबे के नेताओं के आरोपों व उनका साथ छोड़ने की क्रमिक घटना से परेशान हैं. कोलकाता की आंच दिल्ली में भी महसूस की जा रही है. टीएमसी के ज्यादातर वरिष्ठ नेता इन दिनों दिल्ली में हैं. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर जिस तरह से टीएमसी के नेता आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक वचनबद्धता में बदलाव कर रहे हैं

उसके कारण टीएमसी के रणनीतिकार भी परेशान हैं. हालांकि टीएमसी के कुछ वचनबद्धता नेता अभी भी ममता बनर्जी पर विश्वास समर्पित करते हुए संगठन में मची उथल-पुथल को तात्कालिक प्रतिक्रिया मान रहे हैं. उनका मानना है कि यह परीक्षा की घड़ी है . कुछ दिनों में सब सामान्य हो जाएगा.
बसपाई रूख को भांपकर सपा ने कांग्रेस के साथ जारी तल्खी त्यागी पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य का आंकलन करने तथा बसपा व कांग्रेस के बीच पकती खिचड़ी की भनक लगते ही सपाई रूख में अचानक बदलाव दिखने लगा है. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सपा ने कांग्रेस के साथ अपने गठबंधन को भविष्य में भी जारी रखने की वचनबद्धता दोहराते हुए किसी नए समीकरण के बनने या बनाने के पहले ही पानी डाल दिया है. कांग्रेसी रणनीतिकार भी सपा के इस रूख से खुश हैं उन्हें भी अब लगने लगा है कि सीटों के तालमेल के समय उसे कमजोर आंकलन करने की गलतियां अब सहयोगी नहीं करेंगे. कांग्रेसी नेता इस बदलाव को कांग्रेस संगठन की जमीनी मेहनत के कारण उसकी बढ़ती ताकत का परिणाम मान रहे हैं.

सुर्खियों में रहा कॉकरोच जनता पार्टी हालांकि भारत की राजनीति में कॉकरोच जनता पार्टी नाम का कोई भी आधिकारिक या पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है बल्कि यह एक व्यंग्यात्मक आंदोलन है. युवाओं व बेरोजगारों को लेकर कथित तौर पर की गई एक टिप्पणी बाद जिस तरह से अभिजीत दीपके के प्रयास से इस पार्टी का नाम सामने आया और मात्र पांच दिन में सोशल मीडिया पर करोड़ों युवा समर्थकों ने इसके साथ अपने को जोड़ा उससे देश की राजनीतिक में एक अलग बेचैनी बढ़ गई थी. हालांकि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा व लोक व्यवस्था का हवाला देकर इसे भारत में ब्लाक कर दिया है. लेकिन इस प्रयोग व प्रयास ने यह प्रमाणित कर दिया है कि देश के युवाओं व बेरोजगारों के अंदर गुस्से का ज्वार पनप रहा है.

.....

Next Post

आलमपुर-रतनपुरा में आज चार घंटे बिजली रहेगी बंद

Wed May 27 , 2026
भिंड: सेवढ़ा-इंदरगढ़ के बीच डीसीडीएस लाइन खींचने के कार्य के कारण आज बुधवार, 27 मई को सेवढ़ा से निकलने वाली आलमपुर 33 के.व्ही. की विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। इसके चलते आलमपुर और रतनपुरा उपकेंद्रों से जुड़े सभी 11 के.व्ही. फीडरों पर चार घंटे के लिए बिजली कटौती की जाएगी। यह […]

You May Like