प्रवेश कुमार मिश्र
नई दिल्ली:मध्यप्रदेश समेत देश के दस राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव में अंकगणितिय राजनीति के कारण सबकी निगाहें मध्यप्रदेश की राजनीति पर टिकी हुई है. चर्चा है कि क्या भाजपा तीसरी सीट के लिए भी उम्मीदवार खड़ी करेगी? क्या भाजपा स्थानीय बनाम बाहरी की राजनीतिक बहस पर पर्दा डालने के साथ सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरण को साधते हुए आने वाले समय के लिए सूबे की राजनीति की दिशा तय करना चाहेगी?
राजनीतिक जानकार बता रहे हैं कि संख्या बल के गणित के हिसाब से यह चुनाव साधारण नजर आ सकता है, जहां भाजपा दो सीटों पर और कांग्रेस एक सीट पर स्वाभाविक दावेदार हैं. लेकिन परदे के पीछे चल रही गुणा-भाग की राजनीतिक गोटियां और संभावित उम्मीदवारों के नाम यह साफ कर रहे हैं कि भाजपा इस बार न सिर्फ सामाजिक संतुलन साधने जा रही है, बल्कि विपक्ष के पाले में भी सेंध लगाने की फिराक में है.पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बार सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है.
भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया,कांतदेव सिंह, नरोत्तम मिश्रा का नाम आगे चल रहा है लेकिन दूसरे समीकरण को ध्यान में रखकर लाल सिंह आर्य, जयपालसिंह चावड़ा तथा जयभान सिंह पवैया के नाम भी उम्मीदवारों की रेस में आगे चल रहा है. हालांकि दक्षिण के राजनीतिक समीकरण को साधे रखने के लिए केन्द्रीय मंत्री जार्ज कुरियन को फिर से मौका देने को लेकर बहुस्तरीय विचार किया जा रहा है. लेकिन पिछले कई बार से बाहरी नेताओं को मध्यप्रदेश से मौका दिया जाता रहा है इसलिए इस बार आंतरिक राजनीति को ध्यान में रखते हुए पार्टी हाईकमान स्थानीय नेताओं को मौका दे सकता है.
क्रॉस वोटिंग की रणनीति
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि भाजपा कांग्रेस के विधायकों में सेंधमारी यानी क्रॉस वोटिंग कराने की रणनीति पर काम कर रही है. कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि भाजपा किसी ऐसे कद्दावर नेता को इस तीसरी सीट पर उतार सकती है जो हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुआ हो, ताकि कांग्रेस खेमे में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके. इसी वजह से कहा जा रहा है कि भाजपा के लिए यह चुनाव केवल राज्यसभा में अपनी संख्या बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि इसके जरिए वह आने वाले समय के लिए सूबे की राजनीति की दिशा तय करना चाहती है. यदि वह जोड़ तोड़ के सहारे भी तीसरी सीट हासिल करने में कामयाब रहती है, तो यह विपक्षी खेमे के मनोबल को पूरी तरह तोड़ देने वाला ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकता है
