मोबाइल बने सबसे बड़े गवाह, हनीट्रैप कांड में खुलने लगी ‘सेटिंग

इंदौर: शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर की शिकायत से सामने आया हाईप्रोफाइल हनीट्रैप कांड अब शहर की सबसे बड़ी और संवेदनशील जांच बनता जा रहा है. शुरुआत में इसे ब्लैकमेलिंग का सामान्य मामला माना जा रहा था, लेकिन क्राइम ब्रांच की पूछताछ में ऐसे संकेत मिले हैं, जिससे कई रसूखदारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

क्राइम ब्रांच ने श्वेता विजय जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, रेशू चौधरी, लाखन चौधरी, विनोद शर्मा और जितेंद्र पुरोहित को कोर्ट में पेश करने के बाद सभी को जेल भेज दिया. हालांकि जांच एजेंसियों के मुताबिक मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि असली परतें अब खुल रही हैं. पूछताछ में आरोपियों ने कई ऐसे लोगों के नाम उजागर किए हैं, जिनके तार बड़े कारोबारियों और प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं.

एसआईटी ने आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की, जिसमें कई बार बयान बदलने और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश भी सामने आई. लेकिन मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं. जांच में सामने आया है कि जब्त मोबाइल फोन इस पूरे मामले की अहम कड़ी बने हुए हैं. इनमें से चैट, वीडियो, कॉल रिकॉर्डिंग और लेन-देन से जुड़ी जानकारियां मिली हैं. साइबर टीम डिलीट डेटा रिकवर करने में जुटी है. पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति को फंसाने तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित हनीट्रैप और डिजिटल ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है.

मामले में प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल है. जांच अब इस दिशा में भी बढ़ रही है कि क्या आरोपियों को अंदरूनी मदद मिल रही थी और क्या कुछ मामलों में दबाव या सेटिंग के जरिए कार्रवाई प्रभावित की गई. सूत्रों के अनुसार पुलिस उन सभी लोगों की सूची तैयार कर रही है, जिनका आरोपियों से संपर्क रहा है. संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिससे प्रदेश के कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं.

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