हैदराबाद, लंबे समय से सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के साथ विवादों में फंसी दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ (पूर्व नाम ‘पंजाब 95’) आखिरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हो गई है। फिल्म को बिना किसी भव्य प्रचार के ‘साइलेंट ड्रॉप’ के जरिए दर्शकों के बीच लाया गया है। हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के साहसी जीवन और उनके संघर्ष की कहानी को पर्दे पर उकेरती है।
विवादों और कानूनी लड़ाई की लंबी कहानी
यह फिल्म तीन साल तक सेंसर बोर्ड की कड़ी शर्तों के कारण रिलीज नहीं हो पाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीएफसी ने फिल्म में 127 कट और बदलावों की मांग की थी। फिल्म के टाइटल को ‘घल्लूघारा’ से ‘पंजाब 95’ और फिर अंततः ‘सतलुज’ में बदलना पड़ा। इस कानूनी लड़ाई और राजनीतिक चुनौतियों के कारण फिल्म का टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का प्रीमियर भी रद्द कर दिया गया था और इसे सिनेमाघरों में रिलीज होने के बजाय अंततः ओटीटी पर लाया गया।
मानवाधिकारों के संघर्ष की सच्ची गाथा
फिल्म की कहानी पंजाब में उग्रवाद के दौर की उस भयावह सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ 25,000 से अधिक लोग रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे। जसवंत सिंह खालरा के रूप में दिलजीत दोसांझ ने एक बैंक मैनेजर से मानवाधिकार कार्यकर्ता बनने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाई है, जिन्होंने अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई। यह फिल्म उन परिवारों के दर्द और न्याय की तलाश को दर्शाती है जिन्होंने उस दौर में भारी मानवीय कीमत चुकाई थी।

