केसरिया ध्वजों के साथ निकली क्षिप्रा परिक्रमा यात्रा

उज्जैन। सोमवार को मोक्षदायनी मां शिप्रा के पावन तट रामघाट से दो दिवसीय क्षिप्रा परिक्रमा यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। महाकाल की नगरी आस्था, भक्ति और जनसमर्पण के रंग में रंगी दिखाई दी। केसरिया ध्वजों की छटा, संतों के आशीर्वाद और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री आज कई विकास कार्यों के भी सौगात देंगे, लोकार्पण और भूमि पूजन कार्यक्रम भी किए जाएंगे।

करीब 54 किलोमीटर की इस पावन परिक्रमा में 37 तीर्थों का दर्शन कराया जा रहा है। यात्रा में पहले ही दिन 25 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रा का उत्साह दिखाई दिया। मार्ग में जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए, श्रद्धालुओं के लिए स्वल्पाहार, शीतल जल, छांव, कूलर और पंखों की व्यवस्था की गई। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी भागीदारी यात्रा का विशेष आकर्षण रही।

यात्रा के दौरान सांस्कृतिक और भजन संध्याओं का भी विशेष आयोजन किया गया है। दत्त अखाड़ा घाट और रामघाट पर भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर अपने दल के साथ भजन प्रस्तुति देंगी। भारतीय नौसेना का वादन दल भी भक्तिमय प्रस्तुति देगा।

 

23 वर्ष से आज तक-100 श्रद्धालुओं से हजारों यात्री

 

वैभव यादव ने अपने संबोधन में कहा कि 23 वर्ष पहले जो श्रद्धालु हाथ में केसरिया ध्वज लेकर इस यात्रा में चला था, वह आज भी उसी श्रद्धा और आस्था के साथ मां शिप्रा की परिक्रमा कर रहा है। यह यात्रा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक चेतना का जनआंदोलन बन चुकी है। क्षिप्रा लोक सांस्कृतिक समिति के माध्यम से पिछले 23 वर्षों से यह यात्रा निरंतर आयोजित की जा रही है। शुरुआत में जहां कुछ सौ श्रद्धालु शामिल होते थे, वहीं अब हजारों लोग इसमें भाग लेकर मां शिप्रा के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं। संतों ने कहा कि शिप्रा परिक्रमा केवल धार्मिक साधना नहीं, बल्कि जल, जीव और प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी है।

 

आज आयेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 

मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित कर यात्रा का समापन करेंगे। श्रद्धालुओं का कहना है कि सिंहस्थ 2028 से पहले निकली यह क्षिप्रा परिक्रमा यात्रा किसी लघु सिंहस्थ से कम नहीं दिखाई दे रही। जनभागीदारी का ऐसा अद्भुत संगम वर्षों बाद उज्जैन में देखने को मिला है। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा से लेकर लगाकर सभी अधिकारियों द्वारा यात्रा की तैयारी की गई है साथ ही मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आगमन को लेकर भी व्यवस्था की गई है।

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