सतना : बुंदेलखंड की धरती के महान योद्धा और माँ शारदा के परम भक्त वीर आल्हा की जयंती आज 25 मई को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गौरवशाली ढंग से मनाई जाएगी। 12वीं सदी के इस अमर महानायक और उनके भाई ऊदल की वीरता के किस्से आज भी बुंदेलखंड की लोक संस्कृति और रग-रग में बसे हैं।
उनकी वीरता पर आधारित लोकगाथा आल्हा-खंड आज भी लोगों में राष्ट्रभक्ति और वीरता का जोश भर देती है।वीर आल्हा की जयंती के अवसर पर उनकी कर्मभूमि और तपोभूमि में कई भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है,माँ शारदा की पावन नगरी मैहर, जो वीर आल्हा की तपोभूमि रही है, वहां आज आल्हा जयंती का भव्य आयोजन किया जाएगा. इस अवसर पर माँ शारदा के दर्शन के साथ-साथ आल्हा मंदिर और उनके साधना स्थल पर विशेष पूजा- अर्चना की जाएगी।
वही वीर आल्हा के गृह क्षेत्र महोबा (उत्तर प्रदेश) सहित पूरे बुंदेलखंड अंचल में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा आल्हा जयंती मनाई जाती है,ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महोबा के निकट जन्मे वीर आल्हा महान संत गुरु अमरा जिनकी समाधि संभल, यूपी में है के शिष्य थे।आल्हा माँ शारदा के इतने बड़े भक्त थे कि उन्होंने मैहर के पर्वत पर 12 वर्षों तक अत्यंत कठिन तपस्या की थी। मान्यता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर साक्षात देवी मां ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया था।
बुंदेलखंड और मैहर में यह गहरी लोक मान्यता है कि वीर आल्हा आज भी अमर हैं। माना जाता है कि हर दिन तड़के सुबह मंदिर के कपाट खुलने से पहले, वीर आल्हा अदृश्य रूप से आकर माँ शारदा की सबसे पहली पूजा और श्रृंगार करके चले जाते हैं।पराक्रमी योद्धाओं में शुमार आल्हा और ऊदल की यह जयंती युवाओं को अपनी माटी की रक्षा और स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा देती है। आज के दिन बुंदेलखंड के गांवों और कस्बों में आल्हा गायन की गूंज सुनाई देगी
