भोपाल: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश देश में लापता बच्चों के मामलों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2024 में राज्य में 19 हजार 131 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए, जो देशभर में दर्ज कुल मामलों का लगभग 13 प्रतिशत है।बाल अधिकार संस्था क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) द्वारा एनसीआरबी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2023 की तुलना में मध्यप्रदेश में लापता बच्चों के मामलों में लगभग 19.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में ऐसे 16 हजार 17 मामले सामने आए थे।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में मध्यप्रदेश में प्रतिदिन औसतन 52 बच्चे लापता हुए, जिनमें लगभग 42 लड़कियां शामिल रहीं। राज्य में कुल लापता बच्चों में 15 हजार 282 लड़कियां थीं, जो कुल मामलों का करीब 80 प्रतिशत है। वर्ष 2023 में भी यह अनुपात लगभग 78.3 प्रतिशत था।राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2024 में देशभर में लापता बच्चों के कुल एक लाख 47 हजार 175 मामले दर्ज किए गए, जिनमें एक लाख 11 हजार 271 लड़कियां शामिल थीं। वर्ष 2023 की तुलना में देशभर में ऐसे मामलों में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
क्राई की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा रिपोर्टिंग और ट्रेसिंग व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन लड़कियों के मामलों में लगभग 22 प्रतिशत वृद्धि बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जब मध्यप्रदेश में प्रतिदिन औसतन 42 लड़कियां लापता हो रही हों, तो यह बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।एनसीआरबी के जिला स्तरीय आंकड़ों के अनुसार इंदौर में सर्वाधिक एक हजार 124 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद भोपाल में 726, जबलपुर में 613, सागर में 571, धार में 487 और खरगोन में 467 मामले सामने आए।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में मध्यप्रदेश में चार हजार 886 बच्चे अब भी खोजे नहीं जा सके हैं। हालांकि राज्य की ट्रेसिंग दर 2023 के 69.8 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 74.5 प्रतिशत हो गई है, लेकिन लंबित मामलों की संख्या अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।क्राई ने लापता बच्चों, विशेषकर लड़कियों की सुरक्षा के लिए रोकथाम तंत्र मजबूत करने, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय तथा समुदाय आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई है।
