
छतरपुर/लुगासी। महात्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित छतरपुर जिले के लुगासी क्षेत्र के किसानों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। परियोजना के तहत अधिग्रहित की जा रही जमीनों के मुआवजे वितरण और भू-अभिलेखों (land records) में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी को लेकर प्रभावित किसानों ने शुक्रवार दोपहर 2 बजे प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए हेरफेर के आरोप लगाए हैं।
पुश्तैनी जमीनें गलत नामों पर दर्ज, असली हकदार मुआवजे से वंचित
नाराज किसानों का कहना है कि वर्ष 1995 में हुए शासकीय बंदोबस्त (Settlement) के दौरान राजस्व विभाग के मैदानी अमले द्वारा भारी लापरवाही बरती गई थी। उस समय कई वास्तविक किसानों की पुश्तैनी और काबिज जमीनों के रिकॉर्ड में हेरफेर कर उन्हें गलत या अन्य लोगों के नाम पर दर्ज कर दिया गया था। अब जब केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए जमीनों का अधिग्रहण हो रहा है, तो शासन-प्रशासन द्वारा मुआवजा भी उन्हीं गलत रिकॉर्ड धारकों के खातों में ट्रांसफर किया जा रहा है, जो सालों से उस जमीन पर काबिज ही नहीं हैं। इस वजह से वास्तविक और पुश्तैनी किसान अपने हक के मुआवजे से पूरी तरह वंचित हो रहे हैं।
जांच और नए सिरे से मुआवजा निर्धारण की मांग
किसानों ने चेतावनी दी है कि पुश्तैनी जमीनों पर गलत तरीके से मालिकाना हक पाकर मुआवजा हड़पने वाले भू-माफियाओं और इसमें संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और केन-बेतवा परियोजना के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि लुगासी क्षेत्र के भूमि रिकॉर्ड्स का दोबारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए और वास्तविक कब्जाधारियों के दावों की जांच के बाद ही मुआवजे का अंतिम वितरण सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा वे अपनी जमीनों पर परियोजना का काम शुरू नहीं होने देंगे।
