लंदन, (वार्ता) ब्रिटेन ने इजरायल के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि ईरान यूरोप के लिए खतरा बन रहा है।
ब्रिटेन के एक वरिष्ठ मंत्री ने इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) की उन चेतावनियों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि ईरान ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है, जो ब्रिटेन तक मार कर सकती है। इस दौरान उन्होंने इजरायल की ओर से बार -बार दी गई उन चेतावनियों को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि इस्लामिक गणराज्य का हथियारों का जखीरा यूरोप के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।
ब्रिटेन के आवास मंत्री स्टीव रीड ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि ऐसा कोई खास आकलन नहीं है कि ईरानी ब्रिटेन को निशाना बना रहे हैं, या अगर वे चाहें तो ऐसा कर भी सकते हैं। उन्होंने ये टिप्पणी इजरायली अधिकारियों के उन संकेत पर की, जिसमें कहा गया था कि ईरान ने 4,000 किमी (2,485 मील) तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलें विकसित कर ली हैं।
ब्रिटेन के अधिकारियों की ये टिप्पणियाँ ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमताओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई हैं। ये चिंताएँ उन रिपोर्टों के बाद बढ़ी हैं जिनमें कहा गया था कि ईरान ने हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य ठिकाने की ओर मिसाइलें दागी थीं, जो ईरान से लगभग 3,800 किमी दूर है। श्री रीड ने अभियान से जुड़े ब्योरे में जाने से इनकार कर दिया, हालाँकि उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं, जिनमें से एक अपने लक्ष्य से पहले ही गिर गई और दूसरी को बीच में ही रोक लिया गया।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में घटना से परिचित अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जिस मिसाइल को बीच में ही रोका गया था।
आईडीएफ ने कहा है कि ईरान सक्रिय रूप से लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियाँ विकसित कर रहा है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक पहुँचने में सक्षम हैं। आईडीएफ ने कहा, “हम यह कहते आ रहे हैं कि ईरान का आतंकवादी शासन एक वैश्विक खतरा है। अब, ऐसी मिसाइलों को विकसित कर रहा है जो लंदन, पेरिस या बर्लिन तक पहुँच सकती हैं।”
इस आकलन को खारिज करते हुए श्री रीड ने कहा, “जो कहा जा रहा है, उसे साबित करने के लिए कोई आकलन मौजूद नहीं है।” उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में खुद की और अपनी विदेशी संपत्तियों की रक्षा करने की क्षमता बरकरार है। यह आदान-प्रदान ईरान की मिसाइलों की वास्तविक सीमा को लेकर व्यापक अनिश्चितता और परस्पर विरोधी दावों को दर्शाता है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के अनुमानों के अनुसार, ईरान के मौजूदा हथियारों की अधिकतम पहुँच आम तौर पर लगभग 2,000 किमी (1,243 मील) मानी गयी है, जो डिएगो गार्सिया और ब्रिटेन दोनों से काफी कम है। युद्ध शुरू होने से कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि इस्लामिक गणराज्य ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो यूरोप को खतरे में डाल सकती हैं”और अंततः भविष्य में अमेरिका तक भी पहुँच सकती हैं। इससे मौजूदा तैनाती के बजाय भविष्य की क्षमताओं को लेकर चिंताएँ बढ़ गई थीं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान जानबूझकर अपनी मिसाइलों की सीमा 2,000 किमी तक सीमित रखी है, और बार-बार यह तर्क दिया है कि इस्लामिक गणराज्य अपने तत्काल क्षेत्र से बाहर अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करना चाहता है। हालाँकि, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार यह चेतावनी देते रहे हैं कि ईरान के पास यूरोप के अंदरूनी हिस्सों तक पहुँचने की क्षमता है, जिससे ईरान को एक बढ़ते हुए लंबी दूरी के खतरे के रूप में देखने के इज़रायल के दृष्टिकोण को और बल मिलता है।
ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने कहा कि ईरान बहुत, बहुत लंबी दूरी तक मार कर सकने वाली मिसाइलें तैनात कर रहा है, हालाँकि उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि वे ब्रिटेन तक पहुँच सकती हैं या नहीं।
इस मुद्दे की तकनीकी रूप से जटिल प्रकृति की ओर इशारा करते हुए, रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट के सिद्धार्थ कौशल ने कहा कि पेलोड का वज़न कम करके मिसाइल की मारक क्षमता बढ़ाई जा सकती है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने से आमतौर पर उसकी सटीकता और प्रभावशीलता कम हो जाती है, खासकर अंतरमहाद्वीपीय दूरियों पर और भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्रों से गुज़रते समय।
