वाशिंगटन, 21 मई (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की पुरानी राजनयिक परंपराओं से अलग हटते हुए ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से सीधे बात करने की संभावना जताई है। उनके इस बयान को अमेरिका के राजनयिक रुख में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अमेरिका और चीन के बीच तनाव और अधिक बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
साल 1979 के बाद से अमेरिका और ताइवान के राष्ट्रपतियों के बीच कभी कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। इसी वर्ष अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर ताइवान के बजाय चीन को राजनयिक मान्यता दी थी।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को जब संवाददाताओं ने श्री ट्रंप से पूछा कि क्या वह ताइवान के लिए संसद (कांग्रेस) द्वारा मंजूर किए गए एक बड़े हथियार पैकेज पर फैसला लेने से पहले लाई चिंग-ते से संपर्क करने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “मैं उनसे बात करूँगा।”
एयर फ़ोर्स वन विमान में सवार होने से पहले मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर श्री ट्रंप ने कहा, “मैं हर किसी से बात करता हूँ। हमने उस स्थिति को बहुत अच्छी तरह से संभाल रखा है। हम ताइवान की समस्या पर काम करेंगे।” हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन ने इस बातचीत के लिए वाकई में कोई कदम आगे बढ़ाया है या नहीं।
श्री ट्रंप की यह टिप्पणी चीन की उनकी उच्च स्तरीय यात्रा के ठीक कुछ दिनों बाद आई है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर ताइवान के मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया तो यह ‘बेहद खतरनाक स्थिति’ का रूप ले सकता है। चीन का हमेशा से यह रुख रहा है कि ताइवान उसका हिस्सा है और उसने बार-बार इस द्वीप को मुख्य भूमि के नियंत्रण में लाने का संकल्प जताया है, चाहे इसके लिए बल का प्रयोग ही क्यों न करना पड़े।
अपनी पुरानी ‘एक चीन नीति’ (वन चाइना पॉलिसी) के तहत अमेरिका ने कागजों पर चीन के रुख को स्वीकार किया है, लेकिन उसने ताइवान पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की संप्रभुता को कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी है। अमेरिका ताइवान के साथ मजबूत अनौपचारिक संबंध रखता है और ताइवान संबंध अधिनियम (ताइवान रिलेशंस एक्ट) के तहत उसे रक्षात्मक हथियार प्रदान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
ताइवान का यह मुद्दा इस समय इसलिए भी बेहद संवेदनशील हो गया है क्योंकि ट्रंप प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि ताइवान के लिए 14 अरब डॉलर के हथियार सौदे को आगे बढ़ाया जाए या नहीं, जिसे जनवरी में अमेरिकी संसद ने मंजूरी दी थी। अपनी बीजिंग यात्रा के बाद श्री ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने और श्री जिनपिंग ने ताइवान को हथियारों की बिक्री पर ‘विस्तार से’ चर्चा की है और वह बहुत जल्द इस पर कोई फैसला लेंगे।
पिछले हफ्ते एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने ताइवान को हथियारों की बिक्री के अमेरिकी प्रशासन के रिकॉर्ड का जिक्र किया था, जिसमें पिछले साल दिसंबर में की गई 11 अरब डॉलर से अधिक की बिक्री शामिल थी, जो इतिहास में सबसे बड़ी बिक्री में से एक है। अधिकारी ने इसे इस स्वशासित द्वीप के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता का संकेत बताया था।
दूसरी ओर, ताइवान के चारों ओर चीनी सेना की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए पिछले कुछ वर्षों में ताइवान ने हथियारों की खरीद बढ़ा दी है। चीनी सेना (पीएलए) के विमान और नौसैनिक जहाज अब लगभग हर दिन ताइवान के पास सक्रिय रहते हैं और ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास नियमित रूप से बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास करते हैं।
ताइवान पर अमेरिका के इस रुख और श्री ट्रंप और श्री लाई के बीच किसी भी सीधी बातचीत से चीन का नाराज होना तय है। इससे पहले साल 2016 में राष्ट्रपति चुने जाने के दौरान भी श्री ट्रंप ने दशकों पुराने राजनयिक प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए तत्कालीन ताइवानी राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन के साथ सीधे फोन पर बात की थी, जिस पर चीन ने तुरंत कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
इस बीच बुधवार को श्री लाई ने कहा कि ताइवान और अमेरिका के बीच बातचीत के रास्ते ‘हमेशा खुले’ थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ताइवान जलडमरूमध्य में मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “यह चीन है जो ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता को बिगाड़ने का काम करता है। ताइवान की सुरक्षा के लिए अमेरिका से सैन्य खरीद बेहद जरूरी है और हम उम्मीद करते हैं कि ये सैन्य प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।”
दूसरी ओर, चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने श्री लाई पर बाहरी ताकतों के भरोसे ‘स्वतंत्रता’ की राह पर चलने और ताइवान को चीन का हिस्सा मानने की बुनियादी स्थिति को बदलने का प्रयास करने का आरोप लगाया। हालांकि, श्री लाई लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि ताइवान पहले से ही एक संप्रभु राज्य है और उसे औपचारिक रूप से स्वतंत्रता घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
