हाथरस कांड की दोबारा हो जांच, सबूतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का जवाब दे भाजपा सरकार : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 21 मई (वार्ता) कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामले पर बनी डॉक्यूमेंट्री में कई तथ्य और सबूत सामने आए हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए पूरे प्रकरण की दोबारा जांच करायी जानी चाहिए।

महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लाम्बा ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हाथरस में 14 सितंबर 2020 को एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई थी और 29 सितंबर को उसकी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 सितंबर की आधी रात पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने पीड़ित परिवार की एक नहीं सुनी तथा परिवार के सदस्यों को कथित रूप से घर में सीमित कर दिया गया और बेटी का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया। श्रीमती लाम्बा ने आरोप लगाया कि उस समय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया था। उनका कहना था कि यदि उस समय परिवार तक पहुंचने दिया गया होता तो न्याय की प्रक्रिया अलग हो सकती थी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि हाथरस मामले पर बनी डॉक्यूमेंट्री में शामिल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनिकॉलोजिस्ट) ने दावा किया है कि पीड़िता को अस्पताल लाने से पहले सबूत मिटा दिए गए थे तथा उसे नहलाया और साफ किया गया था। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में यह भी सामने आया है कि पीड़ित युवती की स्पाइनल कॉर्ड टूट गई थी और उसे घसीटा गया था, लेकिन उसे एंबुलेंस और स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका दावा था कि पीड़िता ने मृत्यु से पहले अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी थी, लेकिन उसके बयान को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

श्रीमती लाम्बा ने कहा कि हाथरस जैसे गंभीर मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे हैं और यदि समय पर साक्ष्य एकत्र किए गए होते तथा अहम सबूत अदालत में पेश किए गए होते तो दोषियों को सजा मिल सकती थी। उन्होंने सवाल किया कि डॉक्यूमेंट्री में सामने आए तथ्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि दो मार्च 2023 को अदालत ने इस मामले के चार आरोपियों में से तीन को बरी कर दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि मामले की जांच कमजोर की गई, जिसके कारण न्याय प्रभावित हुआ।

 

 

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