फाइलों में कैद शिफ्टिंग का सच: कबाड़खाने जैसी त्रासदी का इंतजार कर रहा भोपाल का हलालपुर पटाखा बाजार?

भोपाल: हलालपुर स्थित पटाखा बाजार एक बार फिर प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है. हाल ही में देवास में हुए भीषण हादसे और उसमें हुई जनहानि के बाद जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है. इसी क्रम में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने एसडीएम को बाजार का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं.
दरअसल, घनी आबादी के बीच संचालित हो रहे इस संवेदनशील पटाखा बाजार को शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग पिछले करीब एक दशक से उठती रही है, लेकिन मामला अब तक सरकारी फाइलों में ही अटका हुआ है. हर बड़े हादसे के बाद प्रशासन शिफ्टिंग की कवायद शुरू करता है, मगर कुछ समय बाद यह मुद्दा फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है.
गौरतलब है कि वर्ष 1997 में कबाड़खाना इलाके में हुए दर्दनाक हादसे के बाद पटाखा बाजार को हलालपुर में स्थानांतरित किया गया था. उस समय यह क्षेत्र शहर से दूर और कम आबादी वाला माना जाता था. लेकिन बीते तीन दशकों में राजधानी के तेजी से विस्तार के चलते अब हलालपुर शहर के प्रमुख हिस्सों में शामिल हो चुका है.
मौजूदा समय में यहां एक दर्जन से अधिक थोक पटाखा दुकानें सड़क किनारे संचालित हो रही हैं, जिनके आसपास बिजली सब-स्टेशन, हाईटेंशन ट्रांसफार्मर, पेट्रोल पंप, अस्पताल, बस स्टैंड और रिहायशी कॉलोनियां मौजूद हैं. ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच किसी बड़े हादसे की आशंका को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है.

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