जबलपुर: शहर में बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के बीच मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। दिन और रात के तापमान में अंतर, कई स्थानों पर जमा पानी और बढ़ती उमस के कारण मच्छरों की संख्या में वृद्धि की शिकायतें सामने आने लगी हैं। इसके चलते मलेरिया, डेंगू और अन्य मच्छर जनित बीमारियों को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। कई क्षेत्रों के नागरिकों का कहना है कि शाम के समय घरों के आसपास मच्छरों की संख्या अधिक महसूस हो रही है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इस विषय पर नवभारत टीम को नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार मच्छर नियंत्रण के लिए वर्तमान में सुबह के समय 12 टीमें अलग-अलग जोन में कार्य कर रही हैं। ये टीमें क्षेत्रवार जाकर निरीक्षण, सर्वे और मच्छर नियंत्रण संबंधी गतिविधियां संचालित करती हैं।
शाम की अलग टीम
शाम के समय 3 अलग टीमें फॉगिंग और स्प्रे का कार्य करती हैं। निगम का कहना है कि मौसम और जरूरत के अनुसार शहर के अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई की जाती है ताकि मच्छरों के प्रभाव को कम किया जा सके। निगम की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि शहर में 4 बड़ी वाहन मशीनों का उपयोग फॉगिंग के लिए किया जाता है। इन मशीनों को अलग-अलग जोन में भेजा जाता है और आवश्यकता के अनुसार अभियान चलाया जाता है। अधिकारियों के अनुसार जिन स्थानों पर लंबे समय तक पानी जमा रहता है या जहां मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक होती है, वहां विशेष रूप से जला ऑयल और बीटीआई पाउडर का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य मच्छरों के लार्वा को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करना बताया गया है।
120 कर्मचारियों की तैनाती
निगम का कहना है कि बारिश और मानसून से पहले भी तैयारी शुरू कर दी जाती है ताकि आने वाले समय में स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके। जानकारी के अनुसार सितंबर माह से मच्छरों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जाती है और करीब 120 अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। इसके साथ ही विभिन्न जोन में निगरानी और नियंत्रण गतिविधियों को तेज करने का दावा किया गया है। हालांकि दूसरी ओर शहर के कई नागरिक निगम के दावों से पूरी तरह सहमत नजर नहीं आए। लोगों का कहना है कि कागजों पर भले अभियान चलने की बात कही जाती हो, लेकिन कई क्षेत्रों में उसका असर दिखाई नहीं देता। नागरिकों का आरोप है कि उनके इलाके में न तो नियमित रूप से फॉगिंग वाहन पहुंचते हैं और न ही कोई टीम दिखाई देती है। कुछ लोगों ने बताया कि कई बार 2 से 3 महीने तक फॉगिंग नहीं होती और शिकायत करने के बाद भी स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आता।
समस्या का हो समाधान
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सभी जोन में समान रूप से कार्रवाई हो और नियमित अंतराल पर फॉगिंग तथा स्प्रे कराया जाए तो मच्छरों की समस्या पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है। लोगों ने यह भी मांग की कि केवल मुख्य सड़कों या चुनिंदा इलाकों तक अभियान सीमित न रहे बल्कि कॉलोनियों और अंदरूनी क्षेत्रों में भी टीमों की पहुंच सुनिश्चित की जाए।
