
जबलपुर। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की अदालत ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पूर्व पति के जीवित रहते विवाह विच्छेद बिना दूसरा विवाह शून्य होता है।
मामले में आवेदक बिलहरी जबलपुर निवासी लोकेश कुमार राव की ओर से दलील दी गई कि आवेदक का विवाह गोरखपुर निवासी सपना उर्फ मोनू पासी के साथ 10 मई 2017 को हिंदू रीति रिवाज के साथ हुआ था। वर्तमान में दोनों पृथक निवासरत हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विवाह के बाद से ही पत्नी अपने पति को परेशान करने लगी थी। वह शारीरिक व मानसिक कष्ट देकर क्रूरता कर रही थी। आवेदक व उसकी पत्नी एक ही कार्यालय में कार्य करते थे। इसी दौरान मधुर संबंध हो गए। सपना ने बताया कि उसके पति दुर्गा प्रसाद की मृत्यु हो चुकी है, उससे उत्पन्न एक पुत्र रौनक है। आवेदक विवाह के लिए तैयार हो गया। लेकिन शादी के बाद से ही सपना संयुक्त परिवार से दूर अलग मकान लेकर रहने दबाव बनाने लगी। विवाद कर मायके चली गई। इसी बीच उसके पहले पति के जीवित रहने और विवाह विच्छेद न होने की जानकारी मिली। इससे साफ हो गया कि आवेदक से किया विवाह अवैधानिक होने के कारण शून्य है। इसीलिए अदालत की शरण ली गई। अदालत ने साफ किया कि ऐसा विवाह शून्य करने अलग से आदेश आवश्यक नहीं, वह प्रारंभ: ही शून्य है।
