
इंदौर। पिछले दिनों उजागर हुए हनीट्रैप सिंडिकेट के मामले में अब जांच और गहराती जा रही है. क्राइम ब्रांच द्वारा मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में लगातार नए एंगल सामने आ रहे हैं. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े बड़े नामों, डिजिटल साक्ष्यों और संभावित पीड़ितों की तलाश में जुटी है.
क्राइम ब्रांच सूत्रों मुताबिक गिरफ्तार आरोपी अलका दीक्षित, जयदीप, लाखन चौधरी, श्वेता जैन और जितेंद्र पुरोहित से रिमांड के दौरान आमने सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है. जांच में सामने आया है कि गैंग सुनियोजित तरीके से हाईप्रोफाइल लोगों को निशाना बनाता था. पहले संपर्क और दोस्ती बढ़ाई जाती, फिर निजी मुलाकातों के दौरान हिडन कैमरों से वीडियो रिकॉर्ड कर लिए जाते थे. इसके बाद इन्हीं वीडियो के जरिए करोड़ों रुपए की उगाही की जाती थी. जांच एजेंसियों को शक है कि गैंग के पास कई नेताओं, अफसरों और कारोबारियों से जुड़े संवेदनशील वीडियो और डेटा अब भी मौजूद हैं. इन डिजिटल साक्ष्यों को अलग अलग जगहों पर छिपाकर रखने की आशंका जताई जा रही है. इसी के चलते पुलिस जब्त मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की गहन जांच कर रही है.
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार सिर्फ ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं थे, बल्कि जमीन, शराब कारोबार, ड्रग्स और अवैध हथियारों से जुड़े एंगल भी खंगाले जा रहे हैं. इसके साथ ही पुलिस महकमे के कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिनसे पूछताछ जारी है. क्राइम ब्रांच सूत्रों का कहना है कि इस पूरे सिंडिकेट का संचालन बेहद शातिर तरीके से किया जाता था. मुलाकात के दौरान सामने वाले व्यक्ति से मोबाइल दूर रखवाया जाता था, जबकि महिलाओं के पर्स और कपड़ों में छिपे कैमरों से वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती थी. बाद में इन्हीं वीडियो को ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बीच आपसी अविश्वास के चलते ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ.
पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गैंग को किन किन लोगों का संरक्षण प्राप्त था और क्या इसके पीछे केवल आर्थिक लाभ था या कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था. क्राइम ब्रांच अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. जांच के दायरे में कई संदिग्ध हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी.
जेल से शुरू हुआ नेटवर्क, हाईप्रोफाइल टारगेट पर फोकस
जांच में सामने आया कि श्वेता जैन और अलका दीक्षित की मुलाकात 2019 में जेल में हुई थी, जहां से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर सिंडिकेट खड़ा किया. गैंग हाईप्रोफाइल पार्टियों के जरिए संपर्क बनाता और पर्स व कपड़ों में छिपे कैमरों से वीडियो रिकॉर्ड करता था. अब पुलिस इस नेटवर्क को मिले संभावित संरक्षण और बड़े कनेक्शन की भी जांच कर रही है.
