इंदौर: शहर में हनीट्रैप के जरिए करोड़ों की उगाही का बड़ा मामला सामने आया है. शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान को फंसाकर एक करोड़ रुपए मांगने वाले गिरोह का क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है. कार्रवाई में महिला तस्कर अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और इंटेलिजेंस शाखा के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को हिरासत में लिया है, जबकि पूरे खेल की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन बताई जा रही है.
बाणगंगा थाना क्षेत्र में रहने वाले 45 वर्षीय कारोबारी ने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी कि परिचित अलका दीक्षित ने उसे प्रॉपर्टी कारोबार के नाम पर लाखन चौधरी से मिलवाया. लाखन ने खुद को बड़ा निवेशक बताते हुए साझेदारी का दबाव बनाया, लेकिन मना करने पर धमकियां शुरू हो गईं. आरोप है कि करीब 20 दिन पहले सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में अलका, उसके बेटे और लाखन ने कारोबारी के साथ मारपीट की और गोली मारने की धमकी दी. इसके बाद आरोपियों ने निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए एक करोड़ रुपए की मांग की. आरोपियों ने साफ कहा कि रकम और 50 प्रतिशत साझेदारी नहीं दी तो समाज में बदनाम कर देंगे. दबाव बढ़ने पर कारोबारी ने सीधे पुलिस से संपर्क किया.
शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने गुप्त तरीके से ऑपरेशन चलाया. देर रात एडिशनल कमिश्नर और डीसीपी स्तर पर योजना बनी और 40 जवानों की सात टीमें गठित की गईं. तड़के तीन बजे द्वारकापुरी और पीथमपुर में एक साथ दबिश दी गई. पहले जयदीप को पकड़ा गया, फिर घेराबंदी कर अलका को उसके निर्माणाधीन मकान से दबोचा गया. दूसरी टीम ने लाखन को भी हिरासत में ले लिया. क्राईम ब्रांच की टीम शाम को भोपाल से श्वेता जैन को उठाकर इंदौर ले आई. इसके बाद की गई पूछताछ और मोबाइल जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा का नाम सामने आया. चैटिंग से पता चला कि वह लगातार अलका के संपर्क में था और कारोबारी के निजी फोटो वीडियो भी उसके पास पहुंचे थे.
आरोप है कि उसी ने दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग की रणनीति सुझाई. पुलिस ने विनोद शर्मा को राजेंद्र नगर स्थित सरकारी आवास से पकड़ा. उसके मोबाइल और लैपटॉप जब्त किए हैं. कार्रवाई के दौरान उसके बेटे ने पुलिस से विवाद भी किया. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अलका दीक्षित पर 17 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. वह पहले शराब तस्करी में सक्रिय थी और बाद में ड्रग नेटवर्क से भी जुड़ गई. आशंका है कि गिरोह लंबे समय से हनीट्रैप के जरिए लोगों को फंसाकर उगाही कर रहा था. पूरे मामले में डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. जांच के चलते अहम जानकारियां फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जा सकती है, लेकिन शुरुआती जांच में संगठित ब्लैकमेलिंग रैकेट के संकेत मिले हैं
