डेम में केवल 45 दिन का पेयजल शेष, समय पर बारिश नहीं हुई तो गहरा सकता है जल संकट

उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में पेयजल संकट की आशंका गहराने लगी है। शहर की लगभग पूरी जलापूर्ति का आधार गंभीर बांध है और वर्तमान स्थिति यह है कि बांध में केवल करीब 45 दिन का पानी शेष बचा है। यदि मानसून समय पर नहीं आया या बारिश सामान्य से कम हुई, तो जून के बाद शहर को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए नगर निगम और प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम तेज कर दिया है, ताकि भीषण गर्मी के बीच शहरवासियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि गंभीर बांध में उपलब्ध जल सीमित है। लेकिन आवश्यकता पडऩे पर नर्मदा नदी के पानी का उपयोग पेयजल आपूर्ति के लिए किया जा सकता है। इसके लिए पाइपलाइन व्यवस्था पहले से तैयार कर ली गई है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पडऩे पर तुरंत वैकल्पिक स्रोतों से जलापूर्ति शुरू की जाएगी।

उज्जैन जैसे धार्मिक और तेजी से विकसित होते शहर के लिए जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। गंभीर बांध में केवल 45 दिन का पानी शेष होना स्पष्ट संकेत है कि यदि अभी से जल संरक्षण, वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग और जल वितरण की नई रणनीति लागू नहीं की गई, तो जून के बाद शहर को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासनिक तैयारी के साथ-साथ नागरिकों को भी पानी बचाने की आदत अपनानी होगी, तभी आने वाले दिनों में शहर की प्यास बुझाई जा सकेगी।

1 दिन छोडक़र सप्लाई जरूरी

विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि यदि वर्तमान की तरह प्रतिदिन जलप्रदाय जारी रहा, तो उपलब्ध पानी तेजी से समाप्त हो सकता है। इसके विपरीत यदि अभी से एक दिन छोडक़र जल वितरण शुरू किया जाए, तो यही पानी लगभग 90 दिन तक चल सकता है। इससे न केवल जल संकट को टाला जा सकेगा, बल्कि मानसून आने तक शहर को राहत मिल सकती है। शहर में सडक़ों के चौड़ीकरण, निर्माण और विकास कार्यों के चलते कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो रही हैं। पाइप फूटने से बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है और मरम्मत में समय लगने के कारण कई क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित हो जाती है। पुरानी और लीकेज वाली पाइपलाइन भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इससे न केवल पानी की बर्बादी होती है, बल्कि कई बार दूषित पानी की शिकायतें भी सामने आती हैं। यदि समय रहते जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो स्थिति बिगडऩे पर लोगों को पानी के लिए टैंकरों, निजी बोरिंग और हैंडपंपों पर निर्भर होना पड़ सकता है। गर्मी बढऩे के साथ जल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रशासन और आम नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है कि हर बूंद का महत्व समझें। यदि किसी क्षेत्र में पानी कम आ रहा है या गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। तो नागरिक तत्काल उज्जैन नगर निगम से संपर्क कर सकते हैं। ताकि समस्या का शीघ्र समाधान किया जा सके।

रोक नहीं तो संकट बढ़ेगा शहर में

जल संकट के बीच शहर में पानी की अनावश्यक बर्बादी भी चिंता का विषय है। कई लोग पीने का पानी भरने के बाद उसी पानी से सडक़ें धोते हैं, वाहन साफ करते हैं और अन्य गैर-जरूरी कार्यों में उपयोग करते हैं। अधिकांश घरों में कई बर्तनों में पानी संग्रहित किया जाता है। लेकिन अगले दिन ताजा पानी आने पर पहले से भरा पानी खाली कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत संकट की घड़ी में भारी पड़ सकती है। इसलिए समय रहते संभलने की आवश्यकता है।

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