बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्टनिस्ट’ आमिर खान का पुराना वीडियो हुआ वायरल, डेब्यू फिल्म के लिए मुंबई की सड़कों पर खुद चिपकाते थे पोस्टर: फैंस हुए भावुक

मुंबई | बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में ‘मिस्टर परफेक्टनिस्ट’ के नाम से विख्यात सुपरस्टार आमिर खान आज सफलता के जिस सर्वोच्च मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने का उनका सफर कड़े संघर्षों से भरा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आमिर खान का साल 1988 का एक बेहद दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने उनके प्रशंसकों को पूरी तरह भावुक कर दिया है। इस वीडियो में आज के वैश्विक मेगास्टार आमिर खान मुंबई के कार्टर रोड पर एक आम युवक की तरह दौड़-दौड़ कर ऑटो-रिक्शा के पीछे अपनी फिल्म के स्टिकर और पोस्टर्स चिपकाते हुए नजर आ रहे हैं। अपनी पहली फिल्म को कामयाब बनाने के लिए आमिर खान ने बिना किसी कूटनीतिक संकोच के जमीनी स्तर पर उतरकर खुद भारी पसीना बहाया था, जो यह साबित करता है कि किसी भी बड़ी सफलता के पीछे कितना अटूट समर्पण छिपा होता है।

डिजिटल मीडिया पर वायरल हो रहा यह पूरा दिलचस्प वाकया साल 1988 में रिलीज हुई कल्ट क्लासिक और सदाबहार रोमांटिक हिंदी फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के कड़े प्रमोशन के समय का है। उस दौर के युवाओं के दिलों में एक खास छाप छोड़ने वाली इस ब्लॉकबस्टर फिल्म का कूटनीतिक निर्देशन मंसूर खान ने किया था, जबकि इसका निर्माण आमिर खान के चाचा और दिग्गज फिल्म निर्माता नासिर हुसैन के बैनर तले हुआ था। चूंकि उस जमाने में आज की तरह आधुनिक डिजिटल पीआर और सोशल मीडिया मार्केटिंग की सुविधाएं मौजूद नहीं थीं, इसलिए फिल्म की पब्लिसिटी बढ़ाने के लिए खुद आमिर खान और उनके साथी कलाकारों ने मुंबई की सड़कों पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इस अनोखे और कड़े तरीके से फिल्म का प्रचार किया था।

इस ऐतिहासिक फिल्म के जरिए नासिर हुसैन के भतीजे आमिर खान ने बतौर मुख्य अभिनेता बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया में अपना पहला कदम रखा था, और उनके अपोजिट खूबसूरत अभिनेत्री जूही चावला मुख्य भूमिका में थीं। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों का ऐसा बेशुमार और कड़ा प्यार मिला कि फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और दोनों कलाकार रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री के बड़े स्टार बन गए। आज भले ही आमिर खान को भारतीय सिनेमा में 100 करोड़ और 500 करोड़ क्लब की फिल्मों का कूटनीतिक गारंटी कार्ड माना जाता हो, लेकिन ऑटो रिक्शा पर पोस्टर चिपकाने वाला उनका यह पुराना जमीनी अंदाज आज भी फिल्म इंडस्ट्री में आने वाले नए और संघर्षशील कलाकारों को कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देता है।

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