धोलेरा | भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण का मुख्य केंद्र बनाने की दिशा में कूटनीतिक रूप से एक बेहद युगांतकारी कदम उठाया गया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स’ और दुनिया की अग्रणी चिप निर्माण उपकरण निर्माता डच कंपनी ‘एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मटेरियल लिथोग्राफी’ (ASML) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए गए हैं। डिजिटल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऐतिहासिक समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की कड़ा गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। दोनों वैश्विक नेताओं ने गुजरात के धोलेरा में स्थापित होने वाले भारत के पहले अत्याधुनिक ‘फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब’ के लिए इस रणनीतिक साझेदारी का दिल से स्वागत किया, जो आने वाले समय में दुनिया की तकनीकी सप्लाई चेन का पूरा समीकरण बदलने का माद्दा रखता है।
इस कूटनीतिक डील पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भविष्य के क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग को लगातार मजबूत किया जा रहा है, और ASML गुजरात के धोलेरा में टाटा की आगामी सेमीकंडक्टर सुविधा की स्थापना व विस्तार में कड़ा तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की यह तेज प्रगति देश के युवाओं के लिए रोजगार के अपार और कड़े अवसर लेकर आ रही है। वहीं, ASML के सीईओ क्रिस्टोफ फौक्वेट ने भारत सरकार की प्राथमिकताओं की सराहना करते हुए कहा कि टाटा देश का पहला सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन फैसिलिटी (फैब) स्थापित करने जा रही है; इस कड़े एमओयू के माध्यम से हम टाटा को विश्वस्तरीय उत्पाद, लिथोग्राफी तकनीक और विशेषज्ञ मानव संसाधन के स्तर पर हर संभव कूटनीतिक सहयोग देंगे।
इस उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी कड़ाई से और जल्द से जल्द लागू करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। नेताओं का मानना है कि यह कूटनीतिक एफटीए भारत और यूरोपीय संघ को खुले बाजार, समावेशी विकास और मजबूत सप्लाई चेन के लिए एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करेगा। इस बैठक में ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीक क्षेत्र की कई प्रमुख डच कंपनियों के सीईओ भी शामिल हुए, जिन्होंने भारत के आर्थिक सुधार एजेंडे की कड़क सराहना की। जानकारों का मानना है कि टाटा और एएसएमएल के इस कड़े गठबंधन से चिप निर्माण में एकाधिकार रखने वाले चीन और तकनीक पर वर्चस्व रखने वाले अमेरिका जैसे देशों के बीच कूटनीतिक हलचल और टेंशन बढ़ना स्वाभाविक है।

