उज्जैन: सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए शहर में प्रस्तावित दो एलिवेटेड ब्रिजों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं. उच्च न्यायालय में मामला लंबित होने और स्थगन आदेश लागू होने के बावजूद अधिकारियों ने भूमि पूजन की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं.अब जैसे ही स्थगन आदेश हटेगा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों भूमि पूजन कर निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की योजना है. समय कम है काम ज्यादा है इसलिए अधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी है.
टू लेन और फोरलेन दो शाखा
लोक निर्माण विभाग की तकनीकी शाखा का कहना है कि परियोजना पूरी तरह स्वीकृत है, निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कार्य प्रारंभ करने के लिए एजेंसियां तैयार हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि निर्माण शुरू होने के बाद मात्र 18 माह में चार लेन और दो लेन वाले दोनों एलिवेटेड ब्रिज तैयार कर लिए जाएं, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन की यातायात व्यवस्था को नया स्वरूप मिल सके.
945 करोड़ से अधिक की स्वीकृति
राज्य शासन और मंत्रिपरिषद ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 945.20 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है. योजना के अंतर्गत कुल 5.32 किलोमीटर लंबा ऊपरी मार्ग नेटवर्क विकसित किया जाएगा.
चिमनगंज मंडी से इंदौर गेट, और निकास तक
पहला चार लेन का मार्ग चिमनगंज मंडी चौराहे से प्रारंभ होकर इंदौर गेट तक पहुंचेगा. दूसरा दो लेन का मार्ग निकास चौराहे से इंदौर गेट तक बनाया जाएगा. इंदौर गेट पर लगभग 10 मीटर ऊंचाई पर एक विशाल जंक्शन तैयार किया जाएगा, जिससे विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहनों का आवागमन सुगम हो सके.
मेट्रो की भी प्लानिंग
परियोजना की विशेषता यह भी है कि इसके स्तंभों की संरचना भविष्य में मेट्रो रेल जैसी सुविधाओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. प्रत्येक स्तंभ लगभग 60 से 70 मीटर की दूरी पर स्थापित किया जाएगा.
सिंहस्थ के लिए अलग मार्ग
अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक उज्जैन पहुंचेंगे. ऐसे में शहर के भीतर और बाहर के यातायात को अलग-अलग मार्गों से संचालित करना आवश्यक है. एलिवेटेड ब्रिज बनने के बाद स्थानीय रहवासी और दैनिक यात्री ऊपरी मार्ग का उपयोग कर सकेंगे, जबकि बाहरी क्षेत्रों से आने वाला सिंहस्थ यातायात अलग मार्गों से संचालित किया जाएगा.
जाम से मिलेगी मुक्ति
इससे महाकाल मंदिर क्षेत्र, रेलवे स्टेशन, इंदौर रोड और प्रमुख बाजारों में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है. प्रशासन का मानना है कि धार्मिक पर्यटन को भी इससे बड़ा लाभ मिलेगा और श्रद्धालु बिना अधिक समय गंवाए गंतव्य तक पहुंच सकेंगे.
व्यापारियों की चिंता, कितनी बार देंगे जमीन
दूसरी ओर शहर के व्यापारियों और प्रभावित नागरिकों में असंतोष भी दिखाई दे रहा है. उनका कहना है कि वर्ष 2004 में महाकाल मार्ग परियोजना, वर्ष 2016 के सिंहस्थ और अब 2028 की तैयारियों के लिए बार-बार उनकी भूमि और प्रतिष्ठानों पर प्रभाव पड़ रहा है.
हाई कोर्ट की शरण में व्यापारी
व्यापारियों का तर्क है कि बाजार क्षेत्रों में निर्माण कार्य और स्तंभों की स्थापना से पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. कई व्यापारिक संगठनों ने इस संबंध में आपत्तियां दर्ज कराते हुए न्यायालय की शरण ली है. उनका कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन इसके साथ प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है.
स्थगन हटते ही शुरू होगा काम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार न्यायालय में प्रस्तुत आपत्तियों का जवाब दिया जा चुका है और स्थगन आदेश हटने की स्थिति में भूमि पूजन के तुरंत बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. अधिकारियों का विश्वास है कि यह परियोजना उज्जैन के यातायात का स्वरूप बदल देगी और सिंहस्थ 2028 के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
कोर्ट पर टिकी निगाहें
विकास और विरोध, दोनों के बीच ब्रिज अटका हुआ है. उहापोह बनी हुई है. एक ओर प्रशासन इसे उज्जैन के भविष्य और सिंहस्थ की आवश्यकता बता रहा है, तो दूसरी ओर व्यापारी अपने अस्तित्व और आजीविका को लेकर चिंतित हैं. अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय के निर्णय पर टिकी हुई हैं
