सीहोर/आष्टा। रविवार की सुबह भोपाल- इंदौर बायपास स्थित एक गैरेज में आग लग जाने से लाखों रुपए का नुकसान हो गया. गैरेज के पीछे सुलग रहे कचरे से उड़ी चिंगारी की चपेट में आए गैरेज मेें खड़ी कई गाडिय़ां जलकर खाक हो गईं तो अन्य सामान भी पूरी तरह स्वाहा हो गया. भीषण आगजनी के दौरान नपा की उदासीनता ने भी लोगों को आक्रोशित कर दिया था. जब गैरज आग के शोलों से घिरा हुआ था तब वहां खड़ी दमकलों में पानी ही नहीं था.
तहसील मुख्यालय आष्टा के बायपास मार्ग स्थित एक मैकेनिक के गैरेज में रविवार की सुबह 7.30 बजे अचानक आग लग गई. जब तक लोगों की नजर आग पर जाती तब तक पूरा गैरेज काले घने धुएं से घिर उठा था और उसमें से आग की लपटें नजर आने लगी थीं. पल-प्रतिपल तेज होगी आग की लपटों को देखकर वहां अफरा तफरी का माहौल निर्मित हो गया था और लोगों की भीड़ जमा हो गई थी. इस दौरान गैरेज में खड़ी गाडिय़ों के टायर धमाके की आवाज के साथ फूटते रहे. आग का विकराल रूप देख लोगों द्वारा नपा के दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन विडम्बना कि आधा घंटे तक दमकल मौके पर नहीं पहुंच सकीं. पता चला कि एक दमकल पंचर खड़ी है तो दूसरी की चाबी नहीं मिल रही है. जैसे तैसे दमकल आई तो पानी खत्म हो गया. मजबूर होकर लोगों ने निजी टैंकर बुलाकर आग पर काबू पाने के जतन किए. इसके बाद कोठरी से आई दमकल ने भी आग बुझाने में सहयोग किया. सुबह 7.30 से लेकर 8.30 बजे तक आग का तांडव चलता रहा.
पीडि़त पक्ष का युवक खुद दमकल को स्टार्ट करके लाया
आसमान छूती आग की लपटों को देखकर जब लोगों द्वारा नपा को सूचना दी तो नपा की खामियां उजागर हो गईं. भीषण आग ने नपा के आपदा प्रबंधन की धज्जियां उड़ाकर रख दीं. नपा की लापरवाही के कारण ग्राहकों की 15 से 20 गाडिय़ां कबाड़ में तब्दील हो गईं. पीडि़त गैरेज संचालक ने नवभारत को बताया कि नपा की दमकलों का यह हाल है कि एक फायर ब्रिगेड पहले से पंचर लावारिस खड़ी थी, जबकि दूसरी गाड़ी की चाबी ही नपा कर्मियों को नहीं मिल रही थी. अंत में पीडि़त पक्ष के एक युवक को खुद गाड़ी को स्टार्ट करवाकर मौके पर लाया.
पांच मिनट में ही खत्म हुआ फायर ब्रिगेड का पानी
नगर पालिका की नाकामी का तमाशा यहीं खत्म नहीं हुआ. पीडित गैरेज संचालक के मुताबिक जो दमकल जैसे-तैसे मौके पर पहुंची, उसमें पानी का प्रेशर और मात्रा इतनी कम थी कि महज 5 मिनट में ही टैंक खाली हो गया. इसके बाद वह दमकल पानी रीफिल करने के नाम पर जो निकली तो अगले आधे घंटे तक वापस ही नहीं लौटी. इस बीच गैरेज में खड़ी गाडिय़ां एक-एक कर आग की भेंट चढ़ती रहीं और नपा का अमला मूकदर्शक बनकर देखता रहा. स्थानीय लोगों और पीडितों ने खुद अपनी जेब से पैसे खर्च कर टैंकर बुलवा और कोठरी से आई दूसरी दमकल की मदद से जैसे-तैसे आग पर काबू पाया जा सका.
मौके पर नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी
भीषण आगजनी में गैरेज मालिक तबाह हो गया, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष या प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उसका दर्द सुनने मौके पर नहीं पहुंचा. ऐसे में जनता का गुस्सा नपा अध्यक्ष और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सातवें आसमान पर है. दुकान मालिकों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह हादसा नहीं, बल्कि नगर पालिका द्वारा बरती गई घोर लापरवाही है. अगर फायर ब्रिगेड समय पर पानी से भरी और मुस्तैद हालत में आती तो ग्राहकों की गाडिय़ों को खाक होने से बचाया जा सकता था.
