नई दिल्ली | देश के असंगठित क्षेत्र के सबसे बड़े कार्यबल यानी गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने आज देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। ‘गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ (GIPSWU) ने आज शनिवार को दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सभी ऐप-आधारित सेवाओं को पूरी तरह बंद रखने का कड़ा आह्वान किया है। यूनियन की मुख्य मांग है कि पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए सभी डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सेवा पारिश्रमिक ₹20 प्रति किलोमीटर तय किया जाए। इस 5 घंटे की सांकेतिक हड़ताल के कारण आज दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु जैसे तमाम बड़े महानगरों में ओला, उबर, जोमैटो और स्विगी जैसी प्रमुख सेवाएं पूरी तरह ठप रहने की आशंका है।
यूनियन के पदाधिकारियों के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में की गई लगभग ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी इस अचानक उपजे बड़े आक्रोश की मुख्य वजह है। करीब चार वर्षों के अंतराल में हुई इस सबसे बड़ी तेल वृद्धि ने देश के लगभग 1.2 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर सीधा और असहनीय वित्तीय बोझ डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के चलते ईंधन के दाम बढ़े हैं, जिससे डिलीवरी बॉयज और कैब ड्राइवर्स के लिए अपनी गाड़ियों का परिचालन खर्च उठाना और रोजमर्रा का जीवनयापन करना बेहद मुश्किल हो गया है।
GIPSWU की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो, ओला, उबर और रैपिडो जैसी एग्रीगेटर कंपनियों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह पूरा कार्यबल इस समय देश के कई हिस्सों में चल रही भीषण गर्मी और हीटवेव (लू) के थपेड़ों के बीच 12 से 14 घंटे काम कर रहा है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी 10-मिनट की असुरक्षित डिलीवरी प्रणाली और गिरते इंसेंटिव को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ था। यूनियन ने साफ किया है कि यदि तकनीकी कंपनियों और सरकार ने तत्काल न्यूनतम किराए में संशोधन नहीं किया, तो लाखों कामगार इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे और यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है।

