
सतना।प्रदेश में औद्योगिक विकास के चलते तीसरे स्थान पर राजस्व देने वाले सतना जिले के एकमात्र तकनीक शिक्षा विभाग के माध्यम से संचालित 35 वर्ष पुराने पॉलीटेक्निक कॉलेज की शिक्षण व्यवस्था वर्तमान में अतिथि विद्वानों के सहारे चल रही हैं।
उल्लेखनीय है कि शिक्षा में रोजगार को जोड़ने के प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर भले ही देर से हुए हो। पर प्रदेश सरकार ने इस जिले में शिक्षा के साथ तकनीक का ज्ञान देने के लिए वर्षों पहले टेक्निकल स्कूल संचालित किया था इसके बाद जिले के लोगों के भारी मांग पर 1990 में पॉलीटेक्निक कॉलेज की स्थापना की गई। इन 35 वर्षों में पॉलीटेक्निक कॉलेज में ब्रांच बढ़ी तो नहीं पर पुराने की जगह पर कुछ नई ट्रेंड शुरू हुई। वर्तमान में एक वर्ष में 240 छात्रों को 4 ट्रेंड मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सीमेंट टेक्नोलोजी और कंप्यूटर साइंस में प्रवेश दिया जाता है। तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले 720 विद्यार्थियों के लिए कुल 23 शिक्षकीय स्टाफ है। विडंबना यह है कि गणित के शिक्षक का पद स्थायी शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद से रिक्त है वर्तमान में सबासातसौ छात्रों का भविष्य 11 स्थाई शिक्षकों के सहारे है। शेष स्थाई पदों पर 11 अतिथि विद्वान शिक्षकों के जिम्मे है।
व्यवस्था के दृष्टि से जर्जर हो रहे भवन के हालात वर्षों से जस के तस है। महाविद्यालय में छात्रों की उपस्थिति व प्रायोगिक कार्य मनमौजी व्यवस्था से चल रहा है।
महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य कमला अग्रवाल का कहना है कि कॉलेज की कमियों के संदर्भ में कई बार शासन स्तर पर पहल की गई है। समय – समय पर स्थानीय स्तर से भी संसाधन जुटाने के प्रयास किए गए है। छात्रों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिल सके। इसका पूरा प्रयास किया जाता है।
