नयी दिल्ली, 15 मई (वार्ता) निर्यातकों के शीर्ष संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) ने देश से वाणिज्यिक वस्तु निर्यात के अप्रैल 2026 के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद देश के निर्यात में मजबूत मासिक वृद्धि घरेलू निर्यात क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाती है।
शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 13 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 43.56 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। अप्रैल 2025 में यह 38.28 अरब अमेरिकी डॉलर था।इसी दौरान आयात भी पिछले वर्ष इसी अवधि के 65.38 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर से 71.94 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। अप्रैल में कुल निर्यात (वस्तुएं एवं सेवाएं) 80.80 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
इन आंकड़ों पर फियो के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि अप्रैल 2026 में वस्तु निर्यात में हुई वृद्धि भारतीय निर्यातकों की मजबूत क्षमता और अनुकूलनशीलता को दर्शाती है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार वातावरण लगातार अनिश्चित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ती लॉजिस्टिक लागतों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन जारी रखा है।
अप्रैल 2026 में हालांकि भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। फियो अध्यक्ष ने कहा कि व्यापार घाटे में यह वृद्धि मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण हुई है। इससे वैश्विक शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए, माल ढुलाई और ऊर्जा लागत बढ़ी तथा भारत के आयात बिल पर महत्वपूर्ण असर पड़ा।
श्री रल्हन ने कहा , ” विशेष रूप से पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के आयात में तेज वृद्धि तथा पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने व्यापार घाटे को और बढ़ाने में योगदान दिया है। फिर भी वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 80.80 अरब अमेरिकी डॉलर रहने से यह संकेत मिलता है कि भारत का बाहरी व्यापार क्षेत्र अभी भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है।”
इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी)- इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक व्यापार में भारी व्यवधान उत्पन्न हुए हैं। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। अप्रैल 2026 में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.76 प्रतिशत बढ़ कर10.35 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 9.52 अरब अमेरिकी डॉलर था।
उन्होंने कहा , ‘ ये आंकड़े हालांकि काफी उत्साहजनक हैं लेकिन लगता यही है कि आने वाले महीने अभी भी चुनौतीपूर्ण बने रहेंगे। इंजीनियरिंग क्षेत्र लगातार कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी का सामना कर रहा है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स लागत में भी भारी वृद्धि हुई है।
ईईपीसी चेयरमैन ने कहा, ‘ भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका में स्टील और उससे जुड़े उत्पादों अब भी ऊंचे शुल्क लागू हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार आवश्यक नीतिगत समर्थन जारी रखेगी।इसके साथ ही हमें यह भी आशा है कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) जल्द से जल्द लागू होगा।’
