
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में संविदा अधिकारियों को पचास फीसदी आरक्षण का लाभ न दिये जाने मामले को गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में अपने अंतरिम आदेश से भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही आयुष विभाग के प्रमुख सचिव, मप्र लोक सेवा आयोग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
दरअसल यह मामले जबलपुर निवासी डॉ. सौरभ चौरसिया, सीहोर निवासी डॉ. अजय अवस्थी सहित 78 संविदा आयुष अधिकारियों की ओर से दायर किये गये है। जिसमें उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की गई है। आवेदकों की ओर से कहा गया कि 11 मार्च 2025 की अधिसूचना के तहत पांच वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले सभी संविदा आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा अधिकारियों को नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं को केवल इस आधार पर वंचित किया जा रहा है कि वे समकक्ष पद पर नहीं हैं। आवेदकों की ओर से कहा गया कि कई याचिकाकर्ता 10 वर्ष से भी अधिक समय से संविदा पर कार्यरत हैं। नियम में यह प्रावधान भी है कि प्रत्येक संविदा अधिकारी को हर वर्ष के 3 प्रतिशत (अधिकतम 15 प्रतिशत) और कार्य करने के वर्ष की आयु सीमा (अधिकतम 55 वर्ष) की छूट दी जाएगी। याचिकाकर्ता उक्त सभी पात्रता पूरी करते हैं, इसके बावजूद उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा रहा है। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए अनावेदकों से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने पक्ष रखा।
