नयी दिल्ली, 14 मई (वार्ता) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) राष्ट्र निर्माण और आर्थिक परिवर्तन के सशक्त उत्प्रेरक के रूप में उभरने के साथ ही नेतृत्व और प्रबंधन शिक्षा में उत्कृष्टता के वैश्विक आदर्श भी बन गए हैं।
श्री प्रधान ने आज भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद में आयोजित भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) के समन्वय मंच की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में आईआईएम की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि छात्र कल्याण, अकादमिक उत्कृष्टता, नवाचार, संस्थागत समन्वय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए आईआईएम लगातार नेतृत्व और प्रबंधन शिक्षा के वैश्विक आदर्श बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आईआईएम न केवल राष्ट्र निर्माण बल्कि आर्थिक परिवर्तन के भी सबसे सशक्त उत्प्रेरकों में से एक बनकर उभरे हैं। नवाचार आधारित इकोसिस्टम को बढ़ावा देकर, वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढालकर और मूल्यों पर आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित कर आईआईएम भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान दे सकते हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने भी आईआईएम समन्वय मंच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच संस्थानों के बीच सहयोग और बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
