सिंदूर के नाम पर सियासत कर रही है भाजपा : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 29 मई (वार्ता) कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके नेतृत्व वाली सरकार अपनी विफलता छिपाने के लिए सिंदूर को ढाल बनाकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के होर्डिंग लगाकर उसमें अपनी फोटो छपवा रहे हैं और अब घर-घर जाकर सिंदूर वितरण कार्यक्रम की घोषणा की गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर पहले ही जमकर राजनीति कर रही है और इसकी सफलता का श्रेय श्री मोदी को देने में पूरी ताकत लगा चुकी है। इससे मन नहीं भरा तो अब घर-घर जाकर सिंदूर की डिब्बी बांटने की घोषणा की गई है। श्री मोदी इसमें भी खेल करेंगे और जिस डिब्बी में सिंदूर जाएगा, उसमें उनकी फोटो छपेगी। इससे पहले भी वह कोरोना सर्टिफिकेट में अपनी फोटो छपवा चुके हैं और सिंदूर की डिब्बी में उनकी फोटो होगी।

उन्होंने कहा, “भाजपा हिंदू धर्म की ‘स्वघोषित ठेकेदार’ है और सिंदूर के नाम पर सियासत कर रही है, लेकिन वे यह भी नहीं जानते कि किसी हिन्दू सनातनी विवाहित महिला की मांग में सिंदूर उसका पति ही सजाता है या फिर उसे ससुराल या सौभाग्य के आशीर्वाद के रूप में शक्ति पीठ या मंदिर से मिलता है। आखिर किस मुंह से महिलाओं के बीच भाजपा-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोग सिंदूर बांटेंगे- जिन महिलाओं का सुहाग उजाड़ा गया, उन आतंकवादियों को तो मौत के घाट अभी तक नहीं उतारा गया है। इनके मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं। भाजपा सांसद रामचंद्र जांगड़ा कहते हैं कि वे महिलाएं वीरांगना नहीं थीं, इसलिए उनके पति गोली का शिकार हुए। ये फेहरिस्त अंतहीन है, लेकिन जब तक ऐसे नेताओं को भाजपा अपनी पार्टी से नहीं निकालती है तब तक भाजपा को अपनी नाक चुल्लू भर पानी में डालकर ही रखनी चाहिए।”

प्रवक्ता ने यह भी कहा, “सिंदूर का स्वरूप और उसका रंग अलग-अलग हो सकता है, लेकिन एक सनातनी विवाहिता के लिए सिंदूर का क्या महत्व है और इसकी क्या पहचान है- मैं भाजपा और संघ के लोगों को समझाना चाहती हूं। क्योंकि मुझे लगता है इन लोगों को सिंदूर का महत्व समझ नहीं आता। सिंदूर प्रतीक है- सुहाग का, सम्मान का, सौभाग्य का, प्रेम के बंधन का, विश्वास के राग का, सुख-दुख के मेल का, सात जन्मों के साथ का और बुरी नजर को भस्म करने वाली एक चुटकी आग का। जो सिंदूर विवाहित महिला की मांग को सजाता है, जो भारत की नारी शक्ति की आन-बान और शान है। उसी मांग के सिंदूर का दुरुपयोग आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा से लिप्त श्री मोदी अपनी ओछी राजनीति में इस्तेमाल करेंगे और इसकी घोषणा मोदी सरकार कर चुकी है। सरकार अपनी राजनीतिक और कूटनीतिक विफलता छिपाने के लिए मांग के सिंदूर को ढाल बनाना चाहती है। सेना के पराक्रम और बहादुरी का श्रेय बटोरने के लिए हर हथकंडे अपना रही है।”

उन्होंने सवाल किया कि नोटबंदी में जिन 200 लोगों की अपना ही पैसा निकालते हुए जान चली गई उनकी विधवाओं की सिंदूर की गवाही कौन देगा। कोविड के दौरान मरघटों में जो 24 घंटे लाशें जलती थीं, गंगा जी का घाट जिन लाशों से पट गया, उनकी उजड़ी मांग की गवाही कौन देगा और तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जो 700 किसान शहीद हो गए, उनकी पत्नियां भी अपनी सूनी मांग लिए बैठी हैं, क्या आप उनके घर सिंदूर लेकर जाएंगे।

 

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