बीजिंग/वाशिंगटन, 14 मई (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यहां आयोजित शिखर वार्ता के दौरान इस बात पर सहमति जताई कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण बंद हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि श्री ट्रंप और श्री शी के बीच “सकारात्मक बैठक” हुई। बयान में ताइवान मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जबकि ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गयी। व्हाइट हाउस के अनुसार दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की, जिनमें अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन में बाजार पहुंच का विस्तार और अमेरिकी उद्योगों में चीनी निवेश बढ़ाना शामिल है। बयान में कहा गया कि अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी बैठक के एक हिस्से में शामिल हुए।
श्री ट्रंप ने अमेरिका में फेंटेनिल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की आपूर्ति रोकने की दिशा में प्रगति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने चीन द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने का मुद्दा उठाया। व्हाइट हाउस ने कहा, “दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि ऊर्जा आपूर्ति के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए।” बयान के अनुसार शी जिनपिंग ने जलडमरूमध्य के “सैन्यीकरण” और उसके उपयोग पर शुल्क लगाए जाने के किसी भी प्रयास का विरोध किया। उन्होंने भविष्य में चीन की इस मार्ग पर निर्भरता कम करने के लिए अधिक अमेरिकी तेल खरीदने में रुचि भी जताई। बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों एवं इजरायल पर हमले किये। साथ ही उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को भी प्रभावी रूप से बंद कर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान, ईरान और यूएई के बीच स्थित रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। अस्थिर युद्धविराम के बीच अमेरिका ने 13 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी समुद्री यातायात को निशाना बनाते हुए नौसैनिक प्रतिबंध भी लागू किए हैं।
इस बीच चीन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि शी जिनपिंग ने ट्रंप को चेतावनी दी कि यदि ताइवान मुद्दे को “सही ढंग से” नहीं संभाला गया तो दोनों देशों के बीच “टकराव और यहां तक कि संघर्ष” हो सकता है।
श्री शी ने कहा, “ताइवान प्रश्न चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। यदि इसे उचित तरीके से संभाला गया, तो द्विपक्षीय संबंध स्थिर बने रहेंगे।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अन्यथा दोनों देशों के बीच टकराव और संघर्ष हो सकता है, जिससे उनके संबंध गंभीर संकट में पड़ जाएंगे।”
श्री शी ने कहा कि पिछले वर्ष 414 अरब डॉलर के द्विपक्षीय आर्थिक संबंध “पारस्परिक लाभ और दोनों पक्षों के लिए फायदे” पर आधारित थे। उन्होंने कहा कि वह श्री ट्रंप के साथ “रणनीतिक स्थिरता पर आधारित रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंध” की नई अवधारणा पर सहमत हुए हैं।

