सतना: परमहंस आश्रम धारकुंडी के संस्थापक 1008 स्वामी सच्चिदानंद महाराज शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने मुंबई स्थित परमहंस आश्रम बदलापुर में अपने दिव्य शरीर का त्याग किया। स्वामी जी की आयु 102 वर्ष थी. बदलापुर आश्रम से स्वामी जी का दिव्य शरीर सडक़ मार्ग से धारकुंडी के लिए देर शाम रवाना किया गया है। यहां बदलापुर के रहाटोली में भी गुरुदेव भगवान के अंति व दिव्य दर्शन के लिए हजारों की तादात में भक्तों का सैलाब मौजूद रहा है। भक्तों और संतों के साथ यह अनंत यात्रा शनिवार की देर शाम को निकली। धारकुंडी आश्रम में निर्माणाधीन मंदिर में उनकी समाधि स्थल बनाई गई है, जहां भक्तजन अंतिम दर्शन के बाद स्वामी सच्चिदानंद महाराज समाधि लेकर परमधाम पहुंचेंगे। इस दौरान आश्रम में विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि भक्तों को कोई असुविधा न हो।
धारकुंंडी पहुंचे गुरुभाई स्वामी अडग़ड़ानंद महाराज
स्वामी सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर उनके गुरुभाई स्वामी अडग़ड़ानंद महाराज जो शक्तेशगढ़ आश्रम यूपी से हैं, जैसे ही लगी वो चौपर से शनिवार शाम को धारकुंडी आश्रम पहुंच चुके हैं। बता दें कि स्वामी अडग़ड़ानंद महाराज स्वामी सच्चिदानंद के गुरु भाई हैं। दोनों ही महापुरुष परमहंस स्वामी 1008 श्री परमानंद महाराज सती अनुसूइया चित्रकूट के शिष्य हैं। उनकी उपस्थिति से आश्रम में संतों और भक्तों का मनोबल बढ़ा है।
व्यवस्थाओं में प्रशासन की सक्रियता व भक्तों का जमावड़ा
महाराजजी के ब्रह्मलीन होने की खबर सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया है। अंतिम दर्शन और आश्रम में अन्य व्यवस्थाओं को लेकर मोर्चा संभाल लिया गया है। एसडीएम मझगवां महिपाल गुर्जर, एसडीओपी चित्रकूट राजेश बंजारे , थाना प्रभारी धारकुंडी, एसपी हंसराज सिंह, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार सहित दोपहर बाद से ही आश्रम से जुड़े लोग पहुंचने लगे हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश क्षेत्र के भक्तजन, आम और खास सभी यहां जुट रहे हैं।
प्रशासन ने यातायात, सुरक्षा और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की है, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। स्वामी सच्चिदानंद महाराज का जीवन आध्यात्मिकता, सेवा और समानता का प्रतीक रहा। उन्होंने धारकुंडी आश्रम को एक ऐसे केंद्र के रूप में स्थापित किया, जहां लाखों लोग आस्था की तलाश में आते हैं। उनके ब्रह्मलीन होने से आध्यात्मिक जगत में एक अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनके उपदेश और आशीर्वाद हमेशा भक्तों के साथ रहेंगे। भक्तों का कहना है कि स्वामीजी अब भी उनके हृदय में विराजमान हैं।
सप्तमी रविवार को होगे अंतिम दर्शन
आश्रम प्रबंधन के अनुसार, महाराजश्री की दिव्य पार्थिव देह को उनके संकल्पों की तपोभूमि सद्गुरू आश्रम धारकुंडी लाया जा रहा है। विशेष बात यह है कि महाराजश्री को सप्तमी (रविवार) के दिन अंतिम दर्शन को रखा जाएगा जहां सोमवार को समाधि देने की बात कही गई है। यह एक दुर्लभ संयोग ही है, धारकुंडी आश्रम में प्रत्येक सप्तमी रविवार का विशेष महत्व रहा है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते थे। अब इसी दिन महाराज श्री का अंतिम दर्शन और समाधि कार्यक्रम संपन्न होगा, जिसके चलते देश भर से लाखों अनुयायियों के धारकुंडी पहुंचने की संभावना है।
