तेहरान/वाशिंगटन, 10 मई (वार्ता) होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रस्ताव को बहरीन एवं अन्य देशों का समर्थन मिलने की रिपोर्टों के बीच ईरानी सैन्य अधिकारियों तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर दबाव जारी रहा तो होर्मुज को “स्थायी रूप से” बंद किया जा सकता है। आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद मौसवी ने कहा कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन इकाइयों ने अपने लक्ष्यों को पहले ही लॉक कर लिया है और केवल आदेश का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मिसाइलें और एयरोस्पेस ड्रोन दुश्मन पर लॉक हैं और हम फायरिंग आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी ठिकानों और “आक्रामक दुश्मन” के जहाज ईरानी हथियारों की जद में हैं। आईआरजीसी नौसेना कमांडर सईद सियाह-सरानी ने कहा कि यदि इस्लामी गणराज्य ईरान पर हमला होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी तेल खेप को गुजरने नहीं दिया जाएगा। ईरानी नौसेना प्रमुख शहराम ईरानी ने कहा कि स्वदेशी हल्की पनडुब्बियां पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात हैं और “ट्रिगर-रेडी” स्थिति में हैं। उनके अनुसार ये पनडुब्बियां समुद्र तल पर लंबे समय तक स्थिर रहकर दुश्मन के जहाजों पर नजर रख सकती हैं और आदेश मिलते ही उन्हें निशाना बना सकती हैं। ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफजल शेखार्ची ने भी चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने वाले किसी भी देश को “निर्णायक जवाब” मिलेगा। स्थानीय मीडिया के अनुसार एक अन्य सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के प्रतिबंध लागू करने वाले देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में “गंभीर कठिनाइयों” का सामना करना पड़ेगा।
आईआरजीसी नौसेना कमान ने कहा कि ईरानी तेल टैंकरों या वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का जवाब क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और दुश्मन जहाजों पर “भारी हमले” के रूप में दिया जाएगा। आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि उसके विशेष बलों ने दक्षिणी बंदरगाह जास्क के निकट अमेरिकी विध्वंसक जहाजों पर जवाबी कार्रवाई की थी। इसमें एंटी-शिप बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ विस्फोटक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरान ने इसे अमेरिकी युद्धविराम उल्लंघन बताया। ईरान ने सात मई को कहा कि अमेरिका ने जलडमरूमध्य में प्रवेश कर रहे दो जहाजों को निशाना बनाया और फ़ारस की खाड़ी में स्थित क़ेश्म द्वीप के नागरिक क्षेत्रों पर हमले किये। श्री ट्रंप ने हाल ही में उस अभियान में अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की, जिसे अमेरिका “प्रोजेक्ट फ़्रीडम” कहता है। यह एक ऐसा अभियान है जिसका उद्देश्य इस जलमार्ग के ज़रिए वाणिज्यिक नौवहन को बहाल करना है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक नाकाबंदी “पूरी तरह से लागू और प्रभावी” बनी रहेगी। ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यदि दुनिया ईरान को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने देती है तो यह “खतरनाक और अवैध” मिसाल होगी। श्री रुबियो ने कहा, “यदि दुनिया यह स्वीकार कर लेती है कि ईरान अब एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को नियंत्रित करेगा, तो कई अन्य देश भी अपने जलमार्गों में ऐसा ही करने लगेंगे।” उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने या मार्ग को नियंत्रित करने की अनुमति नहीं देगा। इसी बीच परमाणु वार्ता को लेकर श्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमें आज कुछ पता चल जाना चाहिए। उम्मीद है कि यह हमें गंभीर वार्ता प्रक्रिया की दिशा में ले जाएगा।”

