सितंबर 2025 में निजी पूंजीगत व्यय 67 प्रतिशत बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये हुआ: सीआईआई

नयी दिल्ली, 10 मई (वार्ता) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को बताया कि भारत का निजी पूंजीगत व्यय सितंबर 2024 के 4.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर 2025 में 67 प्रतिशत बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो देश के निवेश चक्र में व्यापक और मजबूत पुनरुद्धार का अब तक का सबसे निर्णायक संकेत है।

सीआईआई ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान और उसके बाद के लिए उद्योग जगत के लिए पांच-सूत्रीय कार्ययोजना भी प्रस्तुत की है, जिसमें पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में मार्च में की गई कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस लेना भी शामिल है। इसके अलावा, उसने उद्योग द्वारा स्वैच्छिक ऊर्जा संरक्षण संधि, एमएसएमई भुगतान की 45-दिन की गारंटी, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के साथ गहरे आयात प्रतिस्थापन, तथा निजी पूंजीगत व्यय को अग्रिम रूप से बढ़ाने के साथ स्वैच्छिक मूल्य संयम और इंटर्नशिप में वृद्धि करने की सलाह दी है।

उद्योग संगठन ने करीब 1,200 कंपनियों के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर बताया कि निजी क्षेत्र का निवेश – जिसे शुद्ध स्थायी परिसंपत्तियों और निर्माणाधीन पूंजीगत कार्यों में वार्षिक परिवर्तन के रूप में मापा गया – सितंबर 2025 में बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह एक साल पहले के 4.6 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 67 प्रतिशत अधिक है।

इस वृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र ने अग्रणी भूमिका निभाई और कुल निजी पूंजीगत व्यय का लगभग आधा, यानी 3.8 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया। इसमें धातु, ऑटोमोबाइल और रसायन क्षेत्र सबसे आगे रहे। सेवा क्षेत्र ने लगभग 40 प्रतिशत यानी 3.1 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिसका नेतृत्व व्यापार, संचार और आईटी/आईटीईएस क्षेत्रों ने किया।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “निजी पूंजीगत व्यय में 67 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण संकेत है कि भारत का निवेश चक्र निर्णायक रूप से बदल चुका है। क्षमता उपयोग दर 75.6 प्रतिशत तक पहुंचने, ऑर्डर बुक में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि और वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बैंक ऋण वृद्धि लगभग 14 प्रतिशत होने के साथ, निजी क्षेत्र एक दशक से अधिक समय में पहली बार इतने बड़े पैमाने और व्यापक स्तर पर निवेश कर रहा है।”

सीआईआई ने सरकार से ईंधन उत्पाद शुल्क में की गयी कटौती को चरणबद्ध और संतुलित तरीके से वापस लेने का मांग की है ताकि उपभोक्ता भावना को प्रभावित किये बिना सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बड़ा बोझ धीरे-धीरे कम होगा। श्री बनर्जी ने कहा कि उद्योग अपने लाभांश के भीतर लागत दबाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वहन करने के लिए तैयार है। स्वैच्छिक ऊर्जा संरक्षण संधि से भाग लेने वाली कंपनियों में ईंधन और बिजली की खपत में तीन से पांच प्रतिशत की बचत सुनिश्चित होगी।

उन्होंने एमएसएमई को 45 दिन के भीतर भुगतान गारंटी की वकालत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में एमएसएमई की मजबूती के लिए बड़ी कंपनियों का सबसे प्रभावशाली योगदान हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा भारी राजकोषीय लागत पर पेट्रोल और डीजल पर की गयी 10 रुपये प्रति लीटर केंद्रीय उत्पाद शुल्क कटौती को कच्चे तेल की कीमतों के स्थिर होने के साथ छह से नौ महीने में चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जाना चाहिये।

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