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रतलाम। साइबर अपराधी अब ठगी के ऐसे नए तरीके अपना रहे हैं, जिनसे आम लोग ही नहीं बल्कि बैंक और पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं। शहर में एक पटवारी के साथ हुई साइबर ठगी की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह रही कि पीडि़त के पास न कोई फर्जी कॉल आया, न किसी ने ओटीपी मांगा और न ही उन्होंने किसी अनजान व्यक्ति को बैंक संबंधी जानकारी दी, इसके बावजूद उनके खाते से करीब तीन लाख रुपये निकाल लिए गए।
जानकारी के अनुसार काटजू नगर निवासी एक पटवारी ने कुछ समय पहले पारिवारिक आवश्यकताओं के चलते अपने जीपीएफ खाते से 5 लाख रुपये निकाले थे। यह राशि एसबीआई की कलेक्ट्रेट शाखा स्थित खाते में जमा थी। इसी खाते को साइबर ठगों ने निशाना बना लिया।
बताया जा रहा है कि 27 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से रकम निकाली गई। पहले दिन 98 हजार रुपये, दूसरे दिन 97 हजार 1 रुपये और तीसरे दिन फिर 98 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 2 लाख 93 हजार 1 रुपये खाते से गायब हो गए। पीडि़त को इसकी भनक तक नहीं लगी। 30 अप्रैल को जब उन्होंने नियमित रूप से बैंक बैलेंस चेक किया तब खाते से रकम कटने की जानकारी सामने आई। इसके बाद उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस को सूचना दी। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, मोबाइल में केवल भरोसेमंद एप ही इंस्टॉल करें और बैंक खाते से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत बैंक व साइबर हेल्पलाइन को दें। साथ ही मोबाइल की सिक्योरिटी अपडेट रखना भी जरूरी बताया गया है।
हैक कर हुई वारदात
साइबर जानकारों के अनुसार इस तरह की घटनाओं में कई बार मोबाइल फोन को रिमोट एक्सेस के जरिए हैक कर लिया जाता है। उपयोगकर्ता द्वारा किसी संदिग्ध लिंक, वेबसाइट या एप्लीकेशन पर क्लिक करते ही ठग मोबाइल तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद वे चुपचाप बैंकिंग एप और मैसेज पर नजर रखते हैं तथा सही समय देखकर खाते से रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
पुलिस बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी जुटा रही
मामले की जांच औद्योगिक थाना पुलिस द्वारा की जा रही है। पुलिस उन बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी जुटा रही है, जहां यह रकम ट्रांसफर की गई। शुरुआती जांच में साइबर ठगी का तरीका काफी तकनीकी माना जा रहा है।
