
जबलपुर। अवमानना याचिका का निराकरण होने के बावजूद भी पुलिस के द्वारा महिला रजिस्ट्रार को गिरफ्तार कर पेश किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक मिश्रा ने सुनवाई के दौरान पाया कि पूर्व में महिला रजिस्ट्रार के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया था। कोर्ट के सामने जबरदस्ती पेश करने के निर्देश जारी नहीं किये गये थे। हाईकोर्ट ने महिला सब इंस्पेक्टर तथा एसडीओपी चित्रकूट को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया था। पुलिस अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि महिला रजिस्ट्रार ने बेल बॉन्ड नहीं भरा है। उनकी तरफ से हलफनामा पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 13 मई को निर्धारित करते हुए दोनों पुलिस अधिकारी को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश जारी किये।
महात्मा गांधी ग्रामोदय यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रमिला सिंह की तरफ से देयक का भुगतान नहीं किये जाने के संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट ने दिसम्बर 2024 में याचिका का निराकरण विश्वविद्यालय प्रशासन को देयकों का भुगतान करने निर्देश जारी किये थे। आदेश का पालन नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता की तरफ से अवमानना याचिका दायर की गयी थी।
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि याचिकाकर्ता को सेवानिवृत्त हुए सात साल हो गये है परंतु सेवा देयकों का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव के खिलाफ 25 हजार रुपये का जमानती वारंट सतना पुलिस अधीक्षक के माध्यम से जारी किया था। हाईकोर्ट ने महिला रजिस्ट्रार को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश जारी किये थे।
याचिका पर विगत 6 मई को हुई सुनवाई के दौरान महिला रजिस्ट्रार की अधिवक्ता ने परिपालन रिपोर्ट पेश करते हुए भुगतान की रसीद प्रस्तुत की। उनकी तरफ से बताया गया कि अनावेदक बनाई गयी महिला रजिस्ट्रार का स्थानांतरण जून 2025 में रीवा विश्वविद्यालय में हो गया था। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका का निराकरण कर दिया था।
याचिका का निराकरण होने के बाद पुलिस के द्वारा महिला रजिस्ट्रार को हाईकोर्ट में पेश किया गया। हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि महिला रजिस्ट्रार को
कोर्ट के सामने जबरदस्ती पेश करने के कोई निर्देश नहीं दिये थे। चित्रकूट पुलिस स्टेशन में पदस्थ सब इंस्पेक्टर सुश्री नेहा ठाकुर ने बताया कि उन्होंने एसडीओपी चित्रकूट के आदेश पर महिला रजिस्ट्रार को कोर्ट के सामने पेश किया है। इसके अलावा महिला रजिस्ट्रार ने बेल बॉन्ड नहीं भरा है। महिला रजिस्ट्रार के अधिवक्ता ने एकलपीठ को बताया कि अवमानना याचिका का निराकरण होने के संबंध में उन्होंने एसडीओपी को व्यक्तिगत रूप से सुचित किया था। इसके बावजूद भी उन्होंने महिला रजिस्ट्रार को रिहा करने से मना कर दिया है। उनका कहना था कि महिला रजिस्ट्रार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जायेगा। एकलपीठ ने महिला रजिस्ट्रार को तत्काल रिहा करने के आदेश जारी करते हुए 7 मई को महिला सब इंस्पेक्टर तथा एसडीओपी राजेश बंजारा को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। सुनवाई के दौरान एसडीओपी तथा महिला सब इंस्पेक्टर व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए। उन्होने 6 मई को पारित आदेश के संबंध में हलफनामा पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किये।
