वॉशिंगटन, 09 मई (वार्ता) अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (एनसीसी) प्रमुख जो केंट ने दावा किया है कि हालिया युद्ध से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन था कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा था। श्री केंट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सीआईए सहित सभी अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात पर सहमत थीं कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा था। उन्होंने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में यह आशंका थी कि ईरान क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनायेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करेगा। उन्होंने लिखा, “इस युद्ध की कई त्रासदियों में से एक यह है कि युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात पर सहमत थीं कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा, जिसमें सीआईए भी शामिल है।”
श्री केंट ने आरोप लगाया कि इज़रायल ने अमेरिकी नीति निर्धारण को प्रभावित किया और “इज़रायल ने बहस जीतकर हमें इस युद्ध में धकेल दिया।” उन्होंने कहा कि वह सैद्धांतिक रूप से ईरान युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते। उनके अनुसार ईरान से अमेरिका को कोई “तत्काल खतरा” नहीं था और यह स्पष्ट है कि अमेरिका इस युद्ध में “इज़रायल और उसके प्रभावशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव” में शामिल हुआ। श्री केंट ने दावा किया कि खुफिया एजेंसियों ने पहले ही आगाह किया था कि ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने से वहां के सत्तारूढ़ तंत्र और कट्टरपंथियों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि सटीक खुफिया आकलनों के बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया।
अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए उस पर हमला शुरू किया था। श्री केंट ने आरोप लगाया कि युद्ध के दौरान ट्रंप प्रशासन अपने घोषित उद्देश्यों को लगातार बदलता रहा। श्री केंट ने कहा कि उन्होंने मार्च में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि वह “ईरान के खिलाफ अनुचित अमेरिकी-इज़रायली आक्रामकता” का विरोध कर रहे थे। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था कि ईरान अमेरिका के लिए कोई तात्कालिक खतरा नहीं था और कुछ राजनीतिक शक्तियों ने बाहरी प्रभाव में आकर अमेरिका को युद्ध में धकेला। nउन्होंने अमेरिकी विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक नैरेटिव के कारण खुफिया सूचनाओं को कमजोर किया गया और युद्ध को इज़राइल तथा उसके समर्थकों के दबाव में आगे बढ़ाया गया। उन्होंने आशंका जताई कि यह संघर्ष अमेरिका को एक और लंबे पश्चिम एशिया युद्ध में धकेल सकता है और युद्ध तक पहुंचने वाली निर्णय प्रक्रिया की पुनर्समीक्षा की जरूरत है।
उन्होंने लिखा, “जून 2025 तक आप समझते थे कि मध्य-पूर्व के युद्ध एक जाल हैं, जिन्होंने अमेरिका के सैनिकों की जान ली और देश की समृद्धि को नुकसान पहुंचाया।” उन्होंने श्री ट्रंप के पहले कार्यकाल में कासिम सुलेमानी की हत्या और आईएसआईएस के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सैन्य शक्ति का उपयोग बिना लंबे युद्ध में फंसे किया गया था। श्री केंट ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ इज़राइली अधिकारियों और अमेरिकी मीडिया के प्रभावशाली वर्ग ने “भ्रामक अभियान” चलाकर ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को कमजोर किया और ईरान युद्ध के पक्ष में माहौल बनाया। उन्होंने कहा, “यह एक झूठ था और वही तरीका था जिसका इस्तेमाल इज़रायल ने इराक युद्ध में अमेरिका को खींचने के लिए किया था, जिसमें हमारे हजारों सैनिकों की जान गयी। हमें यह गलती दोबारा नहीं करनी चाहिए।”

