मुंबई, 09 मई (वार्ता) मदर्स डे के मौके पर सोनी सब के कलाकार गुलकी जोशी, दीक्षा जोशी, नितिन बाबू और ऋषि सक्सेना ने अपनी अनदेखी यादें और अनमोल पल साझा किए, साथ ही जीवन के उन जरूरी पाठों को याद किया, जो पीढ़ियों से आगे बढ़ते आए हैं। कलाकारों ने अपनी माताओं के प्रति दिल से आभार जताया, जिन्होंने हर चुनौती और हर पड़ाव पर उनका साथ दिया और उनकी ज़िंदगी को पर्दे पर और पर्दे के पीछे शांति से आकार दिया। ‘यादें’ में सृष्टि का किरदार निभा रही गुलकी जोशी ने कहा, “बचपन से ही मेरी माँ मेरी सबसे बड़ी उत्साहवर्धक रही हैं और मेरे लिए साहस की मिसाल रही हैं। आज भी मैं उनकी वही छवि अपने साथ लेकर चलती हूँ। वे मेरे जीवन की सबसे मजबूत महिलाओं में से एक हैं। उन्होंने मुझे सिखाया है कि जीवन को दया और धैर्य के साथ जीना चाहिए, खासकर इस तेज़-तर्रार इंडस्ट्री में। जब भी हालात मुश्किल होते हैं, मैं उन्हीं की ओर रुख करती हूँ और एक दम से सब कुछ हल्का लगने लगता है। वे सच में मेरी हर चीज़ की भावनात्मक रीढ़ हैं।”
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में दीप्ति का किरदार निभा रही दीक्षा जोशी ने कहा, “बचपन से ही मेरी माँ मेरी सबसे बड़ी चीयरलीडर और सबसे सुरक्षित जगह रही हैं। मुझे आज भी याद है कि मेरी छोटी-सी उपलब्धियों को भी वे ऐसे मनाती थीं कि वह भी बहुत खास बन जाया करती थीं। यह आदत आज भी मेरे साथ है। उन्होंने मुझे सिखाया है कि ज़िंदगी को हमेशा दयालुता और धैर्य के साथ जीना चाहिए, खासकर इस तेज़ रफ्तार इंडस्ट्री में। जब भी हालात मुश्किल होते हैं, मैं उन्हीं के पास जाती हूँ और सब कुछ हल्का लगने लगता है। मेरी हर कामयाबी की वजह मेरी माँ हैं।” ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में चिराग का किरदार निभा रहे नितिन बाबू ने कहा, “मेरी माँ के साथ बहुत सारी यादें जुड़ी हैं, लेकिन सबसे खास यह है कि उन्होंने हमेशा मुझे अपनी राह चुनने के लिए प्रोत्साहित किया। घर से दूर जाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी मुझे अकेला महसूस नहीं होने दिया। उनका सबसे बड़ा सबक यही रहा है कि हर हाल में खुद के प्रति सच्चे रहो। यही मुझे निजी और पेशेवर दोनों ज़िंदगी में मदद करता है। आज भी उनका विश्वास मुझे आगे बढ़ने और हर दिन बेहतर करने की ताकत देता है।”
‘इत्ती सी खुशी’ में संजय का किरदार निभा रहे ऋषि सक्सेना ने कहा, “मदर्स डे मुझे हमेशा उस शांत ताकत की याद दिलाता है, जो हर माँ अपने भीतर लिए रहती हैं। हाल ही में मुझे अपना बचपन का एक पुराना फोटो मिला और उससे जुड़ी ढेर सारी यादें ताज़ा हो गईं उनकी लगातार मदद और त्याग की। वे हमेशा पर्दे के पीछे सब कुछ संभालती रही हैं। उन्होंने मुझे सबसे बड़ा सबक दिया है मजबूती का कि चाहे हालात कितने भी कठिन हों, चलते रहना चाहिए। उनकी ताकत ही मेरी यात्रा की नींव रही है और मैं उनकी मौजूदगी के लिए हमेशा आभारी हूँ।”

