छतरपुर। सनातन धर्म के प्रखर प्रचारक और बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी 21 दिवसीय विशेष आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तराखंड स्थित बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हो गए हैं। धीरेंद्र शास्त्री के प्रस्थान के समय धाम में श्रद्धा और भावुकता का ऐसा अद्भुत नजारा दिखा कि वहां मौजूद हजारों भक्तों की आंखें नम हो गईं।
माता और बालाजी का आशीर्वाद लेकर शुरू किया सफर
साधना की कठिन डगर पर निकलने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने दोपहर 1:30 बजे भगवान बालाजी सरकार के चरणों में मत्था टेका और सन्यासी बाबा से आज्ञा ली। इसके पश्चात, अपनी माता जी का आशीर्वाद लेकर वे गंतव्य की ओर बढ़े। विशेष बात यह रही कि मंदिर से माता जी के निवास तक धीरेंद्र शास्त्री पैदल ही चले, जहां रास्ते भर भक्तों ने उन पर फूलों की वर्षा की और आरती उतारकर उनकी साधना की सफलता की कामना की।
6 मई से 26 मई: पूर्ण एकांत और गहन तप
धाम के सेवादार ऋषि शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि धीरेंद्र शास्त्री 6 मई से 26 मई तक पूर्णतः एकांतवास में रहेंगे। इस 21 दिवसीय अवधि के दौरान वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटकर गहन आध्यात्मिक तप करेंगे। 26 मई को साधना पूर्ण होने के बाद, वे 30 मई तक बद्रीनाथ धाम में ही भक्तों को अपनी अमृतवाणी से दिव्य कथा का श्रवण कराएंगे।
जनकल्याण के लिए ‘महासंकल्प’
जैसे ही धीरेंद्र शास्त्री का काफिला रवाना हुआ, धाम ‘जय श्री राम’ और ‘बागेश्वर सरकार की जय’ के जयकारों से गूंज उठा। शिष्यों और भक्तों का मानना है कि धीरेंद्र शास्त्री की यह साधना केवल व्यक्तिगत सिद्धि के लिए नहीं, बल्कि विश्व कल्याण और सनातन धर्म की मजबूती के लिए एक महासंकल्प है।
वापसी का इंतजार: माना जा रहा है कि इस कठिन तपस्या के बाद धीरेंद्र शास्त्री एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ लौटेंगे और पुनः दिव्य दरबारों के माध्यम से जनसेवा के कार्यों में जुटेंगे।
